रायपुर, 23 मार्च (वेदांत समाचार)। छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश में 1 अप्रैल 2026 से नई सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट पॉलिसी लागू होने जा रही है। इस नई व्यवस्था के तहत कचरा प्रबंधन को लेकर नियमों को और सख्त किया गया है। अब शादी, जन्मदिन या किसी भी निजी या सार्वजनिक आयोजन में यदि 100 से अधिक मेहमान शामिल होते हैं, तो आयोजक को कम से कम तीन दिन पहले नगर निगम या नगर पालिका को इसकी सूचना देनी अनिवार्य होगी। नियमों का पालन नहीं करने पर 500 रुपये से लेकर 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा जनवरी 2026 में अधिसूचित यह नई नीति 2016 के पुराने नियमों की जगह लेगी। इसका मुख्य उद्देश्य कचरे के स्रोत पर ही पृथक्करण को अनिवार्य बनाना और लैंडफिल पर निर्भरता को कम करना है, जिससे स्वच्छ भारत अभियान को और मजबूती मिल सके।
नई पॉलिसी के तहत अब घरों, संस्थानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में कचरे को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटना जरूरी होगा। इसमें गीला कचरा जैसे रसोई अपशिष्ट और भोजन अवशेष, सूखा कचरा जैसे प्लास्टिक, कागज और धातु, सैनिटरी कचरा जैसे डायपर और नैपकिन, तथा विशेष देखभाल वाले कचरे जैसे बल्ब, बैटरी और दवाइयां शामिल हैं। यदि कोई व्यक्ति मिश्रित कचरा देता है तो संग्रहण वाहन उसे उठाने से मना कर सकते हैं और मौके पर ही जुर्माना लगाया जा सकता है।
नए नियमों में सामाजिक आयोजनों के लिए भी सख्त प्रावधान किए गए हैं। 100 से अधिक लोगों की मौजूदगी वाले आयोजनों के लिए पूर्व सूचना देना जरूरी होगा, ताकि उत्पन्न होने वाले कचरे के प्रबंधन की तैयारी पहले से की जा सके। साथ ही आयोजकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि आयोजन स्थल पर कचरा अलग-अलग रखा जाए और गंदगी न फैले।
इसके अलावा सड़क किनारे व्यवसाय करने वाले रेहड़ी-पटरी वालों के लिए भी नियम कड़े किए गए हैं। अब उन्हें अपने पास डस्टबिन रखना अनिवार्य होगा और दिनभर का कचरा निर्धारित स्थान या निगम के वाहन में ही डालना होगा। सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फैलाने पर कार्रवाई की जाएगी।
बड़े कचरा उत्पादक जैसे आवासीय सोसाइटी, होटल, अस्पताल और विश्वविद्यालयों को अपने स्तर पर ही कचरे का निपटान करना होगा। वहीं कचरा बीनने वालों को पंजीकृत कर उन्हें पहचान पत्र और वर्दी दी जाएगी, ताकि उन्हें औपचारिक व्यवस्था में शामिल किया जा सके।
नई पॉलिसी में डिजिटल ट्रैकिंग और सेंट्रलाइज्ड पोर्टल के माध्यम से कचरे की निगरानी का भी प्रावधान किया गया है। सरकार का मानना है कि इससे कचरा प्रबंधन प्रणाली अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी।
हालांकि, इस नई व्यवस्था को लागू करना स्थानीय निकायों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां पुराने नियमों का भी पूरी तरह पालन नहीं हो पा रहा है। ऐसे में नागरिकों से अपील की गई है कि वे 1 अप्रैल से पहले अपने घरों में कचरे के पृथक्करण की व्यवस्था सुनिश्चित करें और नए नियमों का पालन करें, ताकि स्वच्छ और हरित भारत के लक्ष्य को हासिल किया जा सके।
