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कोरबा में ‘वॉटर इमरजेंसी’: मार्च में ही सूखने लगे जलाशय, 36% से नीचे पहुंचा जलस्तर

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कोरबा,23 मार्च (वेदांत समाचार)| सोमवार, 23 मार्च 2026 जिले के 40 जलाशयों में से 8 का लेवल गेट से नीचे, 60 गांवों पर मंडराया सिंचाई और पेयजल का संकट।

​मुख्य आंकड़े जो चिंता बढ़ा रहे हैं

​जिले में जल संकट ने समय से पहले दस्तक दे दी है। इस साल की स्थिति पिछले वर्षों की तुलना में अधिक भयावह नजर आ रही है:
​कुल जलाशय: 40
​औसत भराव: 36%
​गेट से नीचे जलस्तर: 08 जलाशय
​50% से अधिक पानी: केवल 10 जलाशयों में
​सबसे प्रभावित क्षेत्र: करतला विकासखंड

हॉटस्पॉट: करतला और कोरबा ब्लॉक की हालत पस्त

जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में पानी की स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है:


करतला ब्लॉक: यहाँ के 7 जलाशयों में से केवल जुनवानी (52%) में कुछ राहत है। बाकी सभी में पानी 20-36% के बीच सिमट गया है।


कोरबा ब्लॉक: यहाँ के दो जलाशय हर साल की तरह इस बार भी सूखने की कगार पर हैं।

बेला जलाशय: गेट में लीकेज की समस्या के कारण पानी रोकना नामुमकिन हो रहा है, जिससे संसाधन बर्बाद हो रहे हैं।

किसनो और मवेशियों पर दोहरी मार

​जलाशयों के सूखने का सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पारिस्थितिकी पर पड़ रहा है: सिंचाई ठप: रबी की फसलों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। भू-जल स्तर: तालाबों और जलाशयों के खाली होने से कुओं का जलस्तर भी तेजी से नीचे गिर रहा है। ​बेजुबानों का संघर्ष: ग्रामीण जगन्नाथ राठिया के अनुसार, मवेशियों के लिए पीने के पानी की किल्लत शुरू हो गई है।

जंगली जानवर भी पानी की तलाश में बस्तियों का रुख कर रहे हैं। “हसदेव बांगो में 70% पानी होने के बावजूद बायीं तट नहर से रबी के लिए पानी नहीं छोड़ा जाना किसानों के लिए बड़ी चिंता का विषय है।” विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अभी से जल संरक्षण (Water Conservation) और लीकेज मरम्मत पर ध्यान नहीं दिया गया, तो मई-जून में स्थिति बेकाबू हो सकती है। हालांकि, बांगो बांध का वर्तमान स्टॉक खरीफ सीजन के लिए एक उम्मीद की किरण है, बशर्ते मानसून सामान्य रहे।

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