कोरबा,21 मार्च (वेदांत समाचार)। आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति को लेकर अक्सर यह धारणा रही है कि इसके परिणाम देर से मिलते हैं या गंभीर बीमारियों का पूर्ण उपचार संभव नहीं होता। लेकिन कोरबा में सामने आए एक मामले ने इस सोच को चुनौती दी है। यहां एक ऑटो चालक ने बिना ऑपरेशन के आयुर्वेदिक उपचार से मोतियाबिंद से राहत मिलने का दावा किया है।
जानकारी के अनुसार, कोरबा निवासी ऑटो चालक मुन्ना साहू को आंखों में धुंधलापन महसूस होने लगा था। जांच कराने पर नेत्र विशेषज्ञों ने मोतियाबिंद की पुष्टि करते हुए ऑपरेशन की सलाह दी। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण मुन्ना साहू ने वैकल्पिक उपचार के रूप में आयुर्वेद का सहारा लिया।
इसी दौरान उन्होंने निहारिका स्थित आयुर्वेदाचार्य नाड़ीवैद्य डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा से संपर्क किया। डॉ. शर्मा के मार्गदर्शन में उनका उपचार शुरू किया गया। चिकित्सकीय देखरेख और आयुर्वेदिक औषधियों के उपयोग के बाद कुछ समय में उन्हें राहत मिलने लगी। बताया गया कि अब उनकी दृष्टि में सुधार हुआ है और वे सामान्य रूप से अपना कार्य कर पा रहे हैं।
डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा के अनुसार, आयुर्वेद में शरीर के प्रत्येक अंग की चिकित्सा का विस्तृत वर्णन है। उन्होंने बताया कि इस उपचार में पंचकर्म के अंतर्गत ‘अक्षितर्पण’ प्रक्रिया का उपयोग किया गया। इस प्रक्रिया में आंखों के चारों ओर आटे का घेरा बनाकर उसमें औषधीय घृत एवं जड़ी-बूटियों से तैयार द्रव डाला जाता है, जिससे आंखों को पोषण मिलता है और रक्त संचार में सुधार होता है।
उन्होंने दावा किया कि अक्षितर्पण प्रक्रिया विभिन्न नेत्र रोगों में लाभकारी होती है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी गंभीर बीमारी के उपचार से पहले योग्य चिकित्सक से परामर्श आवश्यक है।
कोरबा का यह मामला आयुर्वेदिक उपचार को लेकर लोगों के बीच नई चर्चा का विषय बन गया है और वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों की ओर ध्यान आकर्षित कर रहा है।
