रायपुर,15 मई (वेदांत समाचार) । जनसंपर्क आयुक्त रजत बंसल ने विभाग की अनुषांगिक संस्था संवाद में कार्यरत एक कर्मचारी को जालसाजी और कदाचार के मामले में दोषसिद्ध पाए जाने के बाद तत्काल विभागीय कार्य से पृथक कर दिया है। उक्त कर्मचारी को सेवा से पृथक किए जाने के संबंध में मु यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह ने भी जनसंपर्क आयुक्त को निर्देशित किया था। जनसंपर्क आयुक्त के इस कदम की विभाग में जमकर सराहना हो रही है और इसे विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार और अनियमित गतिविधियों में शामिल अधिकारियों के लिए चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है।
दरअसल जनसंपर्क विभाग के संवाद में कार्यरत जालसाज कर्मचारी को दोषसिद्दि के बाद भी सेवा से पृथक नहीं करने के मामले में आरटीआई एक्टिविस्ट आशीष देव सोनी ने आयुक्त रजत बंसल को पत्र लिखकर तत्काल कार्रवाई करते हुए उक्त अधिकारी को सेवा से हटाने की मांग की थी। अपने पत्र में उन्होंने लिखा था कि विभागीय जाँच में दोषसिद्ध होने तथा अ यावेदन निरस्त होने के उपरांत भी जालसाज कर्मचारी को पदमुक्त न करने एवं राजकीय कोष के गवन के संबंध में दंडात्मक कार्यवाही नहीं की जा रही है।
आशीष देव सोनी ने आयुक्त को लिखे पत्र में बताया कि छत्तीसगढ़ संवाद में व्याप्त एक ऐसे गंभीर प्रशासनिक कदाचार और वित्तीय अनियमितता की ओर आकृष्ट करना चाहता हूँ, जहाँ समस्त जाँच प्रक्रियाएं पूर्ण होने और अपराध प्रमाणि होने के बावजूद दंडात्मक कार्यवाही को जानबूझकर बाधित किया गया है-
- पूर्णत: प्रमाणित कूटरचना एवं अयोग्यता: विभाग द्वारा गठित उच्च-स्तरीय जाँच समिति (जिसमें जवाहर लाल दरियो, पूरनलाल वर्मा एवं स्वराज्य कुमार दास सम्मिलित थे) ने अपने प्रतिवेदन में निर्विवाद रूप से प्रमाणित किया है कि सव्यसांची कर ने नियुक्ति प्राप्त करने हेतु कूटरचित अनुभव प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया है। प्रकाशन विशेषज्ञ जैसे महत्वपूर्ण तकनीकी पद हेतु संबंधित के पास न तो अनिवार्य तकनीकी अर्हता उपलब्ध है और न ही वैध कार्य अनुभव।
- न्यायालयीन वस्तुस्थिति एवं विधिक सीमा: माननीय उच्च न्यायालय द्वारा प्रकरण क्रमांक 5378 /2020 में पारित आदेश दिनांक 20.01.2021 के अनुसार, कर वर्तमान में एक अपुष्ट () कर्मचारी हैं और उनकी पदोन्नति के दावे को पूर्व में ही अस्वीकार किया जा चुका है। न्यायालय ने केवल उनके स्थाईकरण के दावे पर विचार करने का निर्देश दिया था, जिसे विभाग ने उनकी अयोग्यता एवं दोषसिद्धि के आधार पर पूर्व में ही अमान्य कर दिया है।
- विभागीय आदेश द्वारा पक्ष निरस्तीकरण: यह तथ्य अत्यंत विचारणीय है कि मु य कार्यपालन अधिकारी, छत्तीसगढ़ संवाद द्वारा विधिवत आदेश क्रमांक 2645 दिनांक 25.01.2022 के माध्यम से सव्यसांची कर के समस्त तर्कों एवं अ यावेदनों को आधिकारिक रूप से अमान्य एवं निरस्त किया जा चुका है। प्रशासन द्वारा स्वयं दोषसिद्धि की पुष्टि किए जाने के उपरांत संबंधित को सेवा में बनाए रखने का कोई विधिक अथवा नैतिक आधार शेष नहीं रह जाता है।
- राजकीय कोष की निरंतर क्षति: एक ऐसा व्यक्ति जिसका अपराध सिद्ध हो चुका है और जिसका पक्ष विभाग द्वारा आधिकारिक रूप से खारिज कर दिया गया है, वह वर्तमान में शासन से 1 लाख रुपये प्रतिमाह से अधिक का वेतन आहरित कर रहा है। यह सीधे तौर पर लोक धन का अपव्यय और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के सुसंगत प्रावधानों का प्रत्यक्ष उल्लंघन है।
उन्होंने मांग की थी कि जाँच समिति के निष्कर्षों एवं विभागीय निरस्तीकरण आदेश (2022) के परिपालन में सव्यसांची कर को अविलंब सेवामुक्त किया जाए तथा कूट रचित दस्तावेजों के आधार पर शासन के साथ जालसाजी एवं धोखाधड़ी करने हेतु संबंधित के विरुद्ध तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने हेतु निर्देशित किया जाए। इसके साथ ही अयोग्य होने के बावजूद अब तक प्राप्त किए गए समस्त वेतन एवं भत्तों की सूद सहित वसूली भू-राजस्व की भांति सुनिश्चित की जाए। आशा है कि आपके सक्षम नेतृत्व में शासन के सुशासन के संकल्प के अनुरूप इस प्रमाणित भ्रष्टाचार पर त्वरित प्रहार होगा और उत्तरदायी अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

