Vedant Samachar

1985 में लगाए 100 रुपये आज बन गए इतने , Gold, Sensex या FD किसने निवेशकों को बनाया सबसे ज्यादा अमीर?

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Gold Vs Sensex Vs Deposits: निवेश की दुनिया में आम आदमी के मन में हमेशा एक सवाल रहता है पैसा कहां लगाएं जो सुरक्षित भी रहे और मुनाफा भी दे. बाजार की अनिश्चितता और महंगाई के दौर में यह फैसला लेना और भी मुश्किल हो जाता है. पिछले चार दशकों के आंकड़े इस पहेली को काफी हद तक सुलझाते हैं. WhiteOak Capital की एक रिपोर्ट में 1985 से लेकर अब तक, यानी पिछले 40 सालों में सोना (Gold), शेयर बाजार (Sensex) और बैंक डिपॉजिट (FD) के प्रदर्शन का तुलनात्मक विश्लेषण किया गया है. यह रिपोर्ट न केवल रिटर्न की कहानी बयां करती है, बल्कि यह भी बताती है कि मुश्किल वक्त में किस एसेट क्लास ने निवेशक का साथ नहीं छोड़ा.

किसने मारी बाजी?
अगर हम घड़ी की सुई को पीछे घुमाएं और मान लें कि किसी निवेशक ने साल 1985 में सोना, बैंक एफडी और शेयर बाजार में 100-100 रुपये का निवेश किया होता, तो आज उसकी तस्वीर कैसी होती? आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2025 तक सोने में लगाए गए वो 100 रुपये बढ़कर 6,518 रुपये हो जाते. वहीं, बैंक डिपॉजिट में यह रकम बढ़कर 2,100 रुपये तक पहुंचती.

यहां सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा शेयर बाजार का है. बीएसई सेंसेक्स (Sensex) में निवेशित 100 रुपये की वैल्यू 13,484 रुपये तक पहुंच गई होती. यह आंकड़ा देखकर लगता है कि शेयर बाजार सबसे बेहतर है, लेकिन इसमें जोखिम का पहलू भी उतना ही बड़ा है. सेंसेक्स का यह रिटर्न भारी उतार-चढ़ाव के बाद मिला है, जबकि सोने ने स्थिर रफ्तार से कंपाउंडिंग का लाभ दिया है.

एफडी क्यों पिछड़ गई?
रिपोर्ट बताती है कि बैंक डिपॉजिट में ग्रोथ बेहद धीमी रही है. यदि हम महंगाई दर (Inflation) को हटाकर देखें, तो एफडी में 1985 के 100 रुपये की वास्तविक वैल्यू (Real Value) आज सिर्फ 1,478 रुपये ही रह जाती है.

दशकों के हिसाब से देखें तो 1995, 2005 और 2015 जैसे कई पड़ावों पर इक्विटी का प्रदर्शन भी सोने से कमजोर रहा. इससे यह साबित होता है कि सिर्फ पारंपरिक तरीकों या केवल शेयर बाजार के भरोसे रहकर अमीर बनना आसान नहीं है. सही एसेट एलोकेशन के बिना ‘रियल वेल्थ’ बनाना मुश्किल चुनौती है.

जब बाजार गिरा, तब सोना चमका
सोने को निवेश की दुनिया में ‘संकट का साथी’ कहा जाता है, और आंकड़े भी इसकी तस्दीक करते हैं. वित्तीय इतिहास गवाह है कि जब-जब शेयर बाजार औंधे मुंह गिरा, सोने ने निवेशकों के पोर्टफोलियो को सहारा दिया. उदाहरण के लिए, वित्त वर्ष 2020 में जब सेंसेक्स में 22.9% की भारी गिरावट आई थी, तब सोने ने 29.7% का शानदार पॉजिटिव रिटर्न दिया था.

इसी तरह वित्त वर्ष 2012 में सेंसेक्स 9.2% टूटा था, जबकि सोने ने 32.9% की छलांग लगाई थी. 1985 के बाद से सोने ने औसतन 10.2% का वार्षिक रिटर्न (CAGR) दिया है, जो बैंक डिपॉजिट और महंगाई दर दोनों से काफी बेहतर है.

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