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Sankashti Chaturthi Aarti: संकष्टी चतुर्थी पर जरूर करें यह आरती, गणपति बप्पा दूर करेंगे हर विघ्न!

शनिवार, 8 नवंबर 2025 को संकष्टी चतुर्थी मनाई जा रही है. यह मार्गशीर्ष यानी अगहन मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि पर मनाई जाती है. इसे गणाधिप संकष्टी चतुर्थी भी कहते हैं. इस दिन विघ्नहर्ता गणेश जी की पूजा करना बेहद ही शुभ और लाभकारी माना गया है. गणाधिप संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्र दर्शन के बाद ही पूरा होता है. जब कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी शनिवार या मंगलवार को पड़ती है, तो इसे अंगारकी संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है.

गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा के साथ ही उनकी आरती करना अत्यंत ही शुभ होता है. कहते हैं कि जो भी इस दिन व्रत रखकर पूजा के दौरान गणपति की आरती करता है, उसके जीवन की हर समस्या दूर हो जाती है और खुशहाली का आगमन होता है. ऐसे में आइए पढ़ते हैं संकष्टी चतुर्थी की आरती.

गणेश जी की आरती
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी ।

माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा ।

लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा ॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया ।

बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी ।

कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी ॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

संकष्टी चतुर्थी मंत्र
ॐ श्री गणेशाय नमः:
ॐ गं गणपतये नमः:
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।:
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्ति प्रचोदयात्॥:
ॐ सिद्धि विनायकाय नमः

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