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जांजगीर-चांपा : जिस गांव में पुलिस पर हुआ था हमला, अब वहीं के लोगों ने ली शराब न बनाने की शपथ

जांजगीर-चांपा, 01 नवंबर (वेदांत समाचार)। अवैध कच्ची महुआ शराब की बिक्री और पुलिस पर हुए हमले के लिए चर्चित पामगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम सेमरिया में अब बड़ा बदलाव देखने को मिला है। जिस गांव में कभी पुलिसकर्मियों पर हमला हुआ था, वहीं आज ग्रामीणों ने पुलिस की पहल पर शराब न बनाने की शपथ ली है।

शनिवार को पुलिस अधीक्षक जांजगीर-चांपा विजय कुमार पाण्डेय, एसडीओपी अकलतरा प्रदीप कुमार सोरी, जनपद सदस्य रामचरण पाल, श्रवण गोंड़ सहित सबरिया समाज के गणमान्य नागरिक सेमरिया गांव पहुंचे। यहां सबरिया समाज के लोगों की बैठक लेकर पुलिस अधिकारियों ने उन्हें समझाइश दी और नशे से दूर रहकर मुख्यधारा में शामिल होने का आग्रह किया।

पुलिस अधीक्षक ने बैठक में कहा कि अवैध शराब बनाना और बेचना न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि इससे परिवार और समाज दोनों का नुकसान होता है। उन्होंने सबरिया समाज के लोगों को स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। इस दौरान ग्रामीणों को बिहान योजना से जोड़ा गया और उन्हें गेंदा फूल की खेती, डिटर्जेंट निर्माण, फिनाइल बनाने और मशरूम की खेती का प्रशिक्षण दिया गया।

पुलिस ने बताया कि आगामी 5 नवंबर को पामगढ़ के सामुदायिक भवन में स्वरोजगार के लिए एक प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया जाएगा, जिसमें आसपास के गांवों के लोग भी भाग लेंगे। इस कार्यक्रम में विशेषज्ञों द्वारा लोगों को विभिन्न व्यवसायिक प्रशिक्षण दिए जाएंगे, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।

तीन साल पहले इसी गांव में पुलिस पर हुआ था हमला

गौरतलब है कि करीब तीन साल पहले इसी सेमरिया गांव में पुलिस टीम पर हमला हुआ था। उस समय मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने ममता गोंड़ सबरिया के घर दबिश दी थी, जहां से एक जरीकेन में भरी करीब 12 लीटर अवैध कच्ची महुआ शराब जब्त की गई थी। इसी कार्रवाई के बाद गांव से लौट रही टीम पर करीब 13-14 लोगों ने लाठी-डंडे और रॉड से हमला कर दिया था।

इस हमले में तत्कालीन थाना प्रभारी पामगढ़ उप निरीक्षक ओ.पी. कुर्रे, सउनि शिव चन्द्रा सहित अन्य पुलिसकर्मी घायल हुए थे। मामले में पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार किया था।

अब तीन साल बाद उसी गांव में पुलिस की समझाइश और सतत प्रयासों के बाद लोगों ने नशा छोड़कर आत्मनिर्भरता की राह अपनाने का संकल्प लिया है। यह परिवर्तन न केवल समाज के लिए प्रेरणादायक है, बल्कि पुलिस और जनता के बीच भरोसे की नई मिसाल भी बन रहा है।

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