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Blood Pressure Checking Tips: बीपी चेक करवाते समय किन बातों का ध्यान रखें, कितना होना चाहिए नॉर्मल लेवल

ब्लड प्रेशर (BP) हमारे शरीर में ब्लड फ्लो और हार्ट रेट की ताकत को मापने का एक तरीका है. जब हार्ट खून को पंप करता है, तो यह नसों की दीवारों पर दबाव डालता है, जिसे ही ब्लड प्रेशर कहा जाता है. बीपी के दो माप होते हैं सिस्टोलिक यानी ऊपरी प्रेशर और डायस्टोलिक यानी निचला प्रेशर. सामान्य परिस्थितियों में यह शरीर के कामकाज को बैलेंस रखता है. लेकिन अगर यह लगातार बहुत ज्यादा (हाई बीपी) या बहुत कम (लो बीपी) हो जाए, तो इससे हार्ट अटैक, स्ट्रोक, किडनी डैमेज और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. इसी कारण समय-समय पर बीपी चेक करवाना बेहद जरूरी है ताकि समय रहते समस्या का पता चल सके और उसका इलाज किया जा सके.

सामान्य तौर पर एक स्वस्थ व्यक्ति का ब्लड प्रेशर 120/80 mmHg के आसपास होना चाहिए. इसमें 120 सिस्टोलिक और 80 डायस्टोलिक प्रेशर को दर्शाता है. अगर यह 140/90 mmHg या उससे अधिक हो जाए, तो इसे हाई ब्लड प्रेशर माना जाता है, जबकि 90/60 mmHg से कम होने पर लो ब्लड प्रेशर कहा जाता है. बीपी का स्तर कई कारणों से प्रभावित हो सकता है जैसे अस्वस्थ खानपान, अधिक नमक का सेवन, मोटापा, फिजिकल एक्टिविटी की कमी, तनाव, धूम्रपान, शराब का सेवन और नींद की कमी. इसके अलावा जेनेटिक कारण और बढ़ती उम्र भी ब्लड प्रेशर को प्रभावित करते हैं.

बीपी चेक करवाते समय इन बातों का रखें ध्यान
बीपी की जांच सही और सटीक हो, इसके लिए कुछ जरूरी सावधानियों का पालन करना चाहिए. जांच से कम से कम आधे घंटे पहले चाय, कॉफी, सिगरेट या शराब का सेवन न करें, क्योंकि ये आपके बीपी रीडिंग को प्रभावित कर सकते हैं. बीपी चेक करवाने से ठीक पहले किसी तरह का शारीरिक परिश्रम, भागदौड़ या तनाव से बचें और खुद को आराम दें. जांच के समय सीधे बैठें, पैरों को क्रॉस न करें और हाथ को आराम की स्थिति में रखें. बांह को हार्ट की ऊंचाई पर रखा जाना चाहिए, ताकि मशीन सही प्रेशर दर्ज कर सके. अक्सर लोग लगातार एक ही हाथ से बीपी नापते हैं, लेकिन समय-समय पर दोनों हाथों से जांच करना भी जरूरी है. इसके अलावा अगर डॉक्टर ने कहा है, तो सुबह और शाम अलग-अलग समय पर बीपी की रीडिंग लेना चाहिए, ताकि सही रिजल्ट निकल सके. समय-समय पर जांच करने से पता चलता है कि दवाइयों या लाइफस्टाइल में किए गए बदलाव असर कर रहे हैं या नहीं.

ये भी जरूरी
जांच से पहले गहरी सांस लेकर खुद को रिलैक्स करें.

बीपी मशीन हमेशा कैलिब्रेटेड और भरोसेमंद होनी चाहिए.

एक बार रीडिंग लेकर संतुष्ट न हों, कम से कम दोबारा जांच जरूर करें.

किसी भी असामान्य रीडिंग पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.

घर पर बीपी मॉनिटर का इस्तेमाल करें, लेकिन डॉक्टर की सलाह भी लेते रहें.

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