बिलासपुर,28 जनवरी (वेदांत समाचार) । छत्तीसगढ़ के अचानकमार टाइगर रिजर्व के सारसडोल गांव के करीब जंगल में एक नर बाघ का शव मिला है। बाघ का शव लगभग सड़ चुका था। यह शव उस टीम को मिला जिन्हें दो घायल बाघ को तलाशने की जिम्मेदारी दी गई थी। ये दोनों बाघ ट्रैप कैमरे में घायल हालत में दिखाई दिए थे। पिछले 8 दिन से उनकी तलाश की जा रही है। लेकिन, अब तक उनका कोई पता नहीं चल सका है। जंगल में तैनात टीम उनका पता नहीं लगा सकी है।
बाघ के मरने के बाद लाश सड़ चुकी थी और एटीआर के मैदानी अमले को इसकी भनक तक नहीं लगी। इसे एटीआर प्रबंधन सुरक्षा में बड़ी लापरवाही मानी जा रही है। बाघों की गणना के लिए लगाए गए ट्रैप कैमरे के चिप से डाटा निकाल रहे एटीआर प्रबंधन के अफसरों के होश उस समय उड़ गए जब 20 जनवरी की फोटो में दो बाघ घायल हालत में खून से लथपथ दिखाई दिए।
दोनों ही कैमरों की फोटो सारसडोल से जल्दा रोड के ही थे लेकिन दोनों की दूरी 5 किलोमीटर से अधिक थी। यह जानकारी को अफसरों को हुई। तब उन्होंने एक टीम बनाकर 25 जनवरी को टीम को उस क्षेत्र में रवाना किया जहां पर घायल बाघ दिखाई दिए थे।
टीम क्षेत्र में सर्च कर रही थी तभी उन्हें सारसडोल के परिवृत्त परिसर कुडेरापानी के कक्ष क्रमांक 120 रिजर्व फारेस्ट में दुर्गंध आने लगा। सभी लोग दुर्गंध की तरफ गए तो वहां पर दूर से एक बाघ लेटा दिखाई दिया। करीब पहुंचने पर पता चला कि बाघ का शव सड़ने लगा था।
इसकी जानकारी एटीआर प्रबंधन को दी गई। बाघ की उम्र लगभग 2 साल बताई जा रही है। बाघ की मौत की खबर से वन विभाग के अफसरों में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में डाक्टरों की टीम मौके पर रवाना की गई। मृत बाघ का पोस्टमॉर्टम सोमवार (26 जनवरी) को डाक्टरों की टीम ने एटीआर प्रबंधन के अफसरों, एनटीसीए के प्रतिनिधि और अन्य जानकारी के समक्ष की। पंचनामा में यह पाया गया कि बाघ की गर्दन में बड़े बाघ के चार दांत गड़े हुए हैं जिससे श्वांस नली दबने की वजह से बाघ की मौत हो गई।
बाघ के सभी पैरों के पंजे, नाखून, दांत सभी कुछ मौजूद थे। इसके बाद पोस्टमॉर्टम किया गया तब पता चला कि गर्दन की हड्डी भी कई टुकड़े हो गई है। मृत बाघ के पंजों पर अन्य बाघ के शरीर के बाल थे जो शायद संघर्ष की वजह से उसके पंजे में रह गए। पोस्टमॉर्टम के बाद शव को जला दिया गया। वन विभाग का अमला घायल बाघों का तलाशने निकला था और उन्हें मृत बाघ का शव मिल गया। सारसडोल क्षेत्र में हुए संघर्ष के बाद से घायल दोनों बाघों की तलाश की जा रही है। 20 जनवरी के बाद से दोनों किसी भी ट्रैक कैमरा में दर्ज नहीं हुए हैं। न ही वन विभाग का मैदानी अमला ही उन्हें तलाश पाया है।
अफसर इस बात पर खामोश हैं। वे कोई जवाब नहीं दे रहे हैं। चूंकि बाघ घायल है और वह ऐसी स्थिति में ज्यादा दूर तक चल नहीं पाएगा फिर भी वह टीम को नजर नहीं आ रहा है ऐसी भी आशंका जताई जा रही है कि उनमें से किसी एक की मौत न हो गई हो।
अगर ऐसा होता है तो एटीआर में एक और बाघ कम हो जाएगा। यानी 18 की जगह अब 16 बाघ रह जाएंगे। डिप्टी डायरेक्टर गणेश यूआर का कहना है कि कैमरे में देखे जाने के बाद से घायल बाघ की ट्रेकिंग की जा रही है। पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ अरुण पांडे सोमवार (26 जनवरी) की रात बिलासपुर पहुंचे और सीधे शिवतराई चले गए। रात्रि विश्राम के बाद वे सुबह घटना स्थल सारसडोल के लिए रवाना हो गए। जिसके बाद मौके पर गए।
वहां निशान, आसपास बिखरा खून देखा, अफसरों के साथ जंगल घूमने गए। बाघ की मौत को लेकर मीडिया के सवालों का उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। वहीं, मीडियाकर्मियों से दूरी बनाते रहे। बाघ की मौत सात से आठ दिन पहले हुई है, शव देखकर फिलहाल यही माना जा रहा है। इस लापरवाही के जितने जिम्मेदार वन परिक्षेत्र अधिकारी, डिप्टी रेंजर व बीट गार्ड है, उतने ही टाइगर प्रोटक्शन फोर्स भी है।
प्रबंधन की ओर से फोर्स के सदस्यों को वाहन से लेकर अन्य संसाधन मुहैया कराए गए हैं। बाघों की सुरक्षा व निगरानी केवल यही दायित्व मिला है। ऐसे में फोर्स की भूमिका पर सवाल उठने लगा है। अचानकमार टाइगर रिजर्व एरिया (ATR) में 25 जनवरी 2024 को बाघिन AKT-13 की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। उसके गले में नुकीली चीज से वार के निशान मिले थे, जिससे बाघिन की शिकार की आशंका जताई गई थी।
बाघिन की लाश लमनी से छिरहट्टा जाने वाले मार्ग पर पड़ी थी। वन विभाग के अफसरों को इसकी जानकारी नहीं थी। दूसरे दिन सर्चिंग के दौरान स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स की टीम जब वहां से गुजर रही थी, तब उन्हें मृत बाघिन नजर आई। बाद में प्रबंधन ने दावा किया कि बाघ से संघर्ष के दौरान बाघिन की जान गई।
