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गरियाबंद के जंगलों से घर वापसी की पुकार, इनामी नक्सलियों से परिजनों की भावुक अपील…

मैनपुर ,19 जनवरी (वेदांत समाचार) । गरियाबंद जिले के जंगलों में सक्रिय नक्सलियों को लेकर अब उनके परिवार सामने आने लगे हैं। लंबे समय से जंगल में रह रहे नक्सलियों से उनके परिजनों ने हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की भावुक अपील की है। इस अपील का वीडियो सामने आया है, जो तेलुगु और गोंडी भाषा में रिकॉर्ड किया गया बताया जा रहा है। वीडियो में परिजन गरियाबंद के जंगलों में सक्रिय ऊषा उर्फ संगीता और बलदेव उर्फ बामन से घर लौटने की अपील करते नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि दोनों पर 8-8 लाख रुपये का इनाम घोषित है। परिजनों ने उनसे समर्पण कर शांतिपूर्ण जीवन अपनाने की गुहार लगाई है।

सूत्रों के अनुसार, इस अपील के पीछे नक्सल विरोधी अभियानों की तेज रफ्तार और मार्च 2026 तक नक्सलवाद के खात्मे की सरकार की समयसीमा एक बड़ा कारण है। सुरक्षा बल बस्तर और गरियाबंद के अंदरूनी इलाकों में लगातार ऑपरेशन चला रहे हैं, जिसमें कई नक्सली मारे गए हैं। इससे शेष बचे नक्सलियों के परिवारों में चिंता बढ़ गई है। वीडियो में एक मां और भाई की आवाज साफ सुनाई देती है, जो ऊषा से लौट आने की अपील कर रहे हैं।

वहीं बलदेव के परिजन भी कैमरे के सामने हाथ जोड़कर घर वापसी की गुहार लगाते दिखते हैं। परिजनों का कहना है कि अब बहुत देर न हो जाए, इससे पहले वे सुरक्षित लौट आएं। पूर्व नक्सलियों ने भी इस अपील का समर्थन किया है। हाल ही में सरेंडर कर चुके जानसी, सुनील (डीवीसीएम) और दीपक (एलजीएस कमांडर), जिन पर कुल 24 लाख रुपये का इनाम था, ने अपने पूर्व साथियों से सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ लेने और समाज की मुख्यधारा में लौटने की अपील की है। उन्होंने कहा कि समर्पण के बाद उन्हें सम्मान और सुरक्षित जीवन मिला है।

गरियाबंद–नुवापाड़ा डिवीजन में सक्रिय इनामी नक्सलियों के लिए समय सीमित माना जा रहा है। लगातार चल रहे अभियानों के बीच परिजनों को आशंका है कि यदि तय समयसीमा से पहले समर्पण नहीं हुआ, तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।

यह मामला केवल कानून व्यवस्था का नहीं, बल्कि परिवारों के पुनर्मिलन और जीवन को नई दिशा देने की उम्मीद से भी जुड़ा है। अब यह देखना होगा कि परिजनों और पूर्व साथियों की यह भावुक अपील जंगलों में सक्रिय नक्सलियों पर कितना असर डालती है।

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