कोंडागांव, 05 अप्रैल (वेदांत समाचार)। शहर के हृदयस्थल कालीबाड़ी डीएनके कॉलोनी में इन दिनों धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। ओडिशा के उदयपुर क्षेत्र से आए चरक पूजा से जुड़े शिवभक्तों द्वारा मां काली एवं मां दुर्गा के विविध स्वरूपों का आकर्षक मंचन किया जा रहा है, जिसे देखने के लिए प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
चैत्र माह में आयोजित होने वाला यह पारंपरिक उत्सव 30 दिनों तक चलता है। इस दौरान सत्यं शिवम सुंदरम से जुड़े शिवभक्त विशेष वेशभूषा, संगीत और नाट्य रूपांतरण के माध्यम से देवी के विभिन्न रूपों की जीवंत प्रस्तुति देते हैं। प्रतिदिन शाम करीब 8:30 बजे शुरू होने वाले इस आयोजन में आसपास के क्षेत्र के लोग बड़ी संख्या में शामिल हो रहे हैं।
आस्था से जुड़ी मान्यता के अनुसार, पूजा स्थल के पवित्र जल से स्नान करने पर असाध्य रोगों में भी राहत मिलती है और निःसंतान दंपत्तियों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। चैत्र शुक्ल पक्ष में तालाब से भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना के दौरान विशेष विधि से निर्मित ‘पाट’ का प्रकट होना भक्तों के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है। श्रद्धालु इस पाट को सिर पर रखकर पूरे 30 दिनों तक साधना करते हैं, जिसे दिव्य शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
भक्तों के लिए प्रतिदिन अन्न-भोग प्रसाद का वितरण भी किया जा रहा है। आयोजन को सफल बनाने में कालीबाड़ी समिति एवं महिला समिति की महत्वपूर्ण भूमिका रही। समिति के अध्यक्ष प्रह्लाद शील ने बताया कि इस प्रकार के आयोजन न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करते हैं, बल्कि विभिन्न राज्यों के समुदायों के बीच सांस्कृतिक समन्वय और आपसी भाईचारे को भी बढ़ावा देते हैं।
कार्यक्रम में रामकृष्ण धर, बादल कर्मकार, आशुतोष साहा, गोविंद पाल, अजीत राय, गोविंद चक्रवर्ती, गीता भट्टाचार्य, नीपा सरकार, विशाखा तालुकदार, कविता राय सहित कालीबाड़ी परिवार के सदस्यों का सराहनीय योगदान रहा।
