COAL NEWS कोयला खदानों में कोल स्टॉक की जांच अब होगी हाईटेक, 3 डी लेजर स्कैनर से होगी सटीक माप – vedantsamachar.in

COAL NEWS कोयला खदानों में कोल स्टॉक की जांच अब होगी हाईटेक, 3 डी लेजर स्कैनर से होगी सटीक माप

कोरबा,06 मई (वेदांत समाचार)। KORBA COAL NEWS कोयला खदानों में रखे कोल स्टॉक की जांच व्यवस्था अब पूरी तरह हाईटेक होने जा रही है। कोल इंडिया लिमिटेड ने अपनी सभी अनुषंगी कंपनियों की खदानों में कोयले के स्टॉक की माप और जांच को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए नई तकनीक लागू करने की तैयारी कर ली है। अब पारंपरिक तरीके की जगह थ्रीडी लेजर स्कैनर, न्यूक्लियर डेंसिटोमीटर और वैज्ञानिक फार्मूले के जरिए कोयले के स्टॉक का आकलन किया जाएगा।

जानकारी के अनुसार, कोल इंडिया बोर्ड ने वर्ष 2011 में पारंपरिक मापन पद्धति पर आधारित “न्यू येलो बुक” को मंजूरी दी थी। इसके बाद खनन क्षेत्र में तेजी से तकनीकी बदलाव आए। इन्हें ध्यान में रखते हुए वर्ष 2018 में सीएमपीडीआई के तकनीकी निदेशक की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति बनाई गई थी। समिति ने कई दौर की बैठकों के बाद नई सिफारिशें तैयार कीं। कोयला मंत्रालय के दिशा-निर्देश पर गठित कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर इस नई व्यवस्था को अप्रैल 2026 से लागू कर दिया गया है।

नई प्रणाली के तहत इलेक्ट्रॉनिक टोटल स्टेशन, थ्रीडी टेरेस्ट्रियल लेजर स्कैनर और एयरबोर्न लेजर स्कैनर की मदद से कोयले के ढेर की माप की जाएगी। इसके बाद सॉफ्टवेयर के जरिए सीधे कोयले की वास्तविक मात्रा यानी वॉल्यूम की गणना होगी। इसके साथ ही कोयले के वजन और आयतन का सही अनुपात तय करने के लिए वैज्ञानिक पद्धति अपनाई जाएगी।

कोल इंडिया ने यह भी तय किया है कि कन्वर्जन फैक्टर का हर तीन साल में पुनर्मूल्यांकन किया जाएगा। यदि कोयले का ग्रेड बदलता है या नया स्टॉक तैयार होता है तो दोबारा गणना की जाएगी। ढीले कोयला स्टॉक के लिए टिप्परों के वजन और आयतन के आधार पर माप लिया जाएगा।

नई तकनीक लागू होने के बाद खदानों और पिट क्षेत्रों में कोयला चोरी तथा स्टॉक के गलत आकलन पर काफी हद तक रोक लगने की उम्मीद है। कोयले की ओवररिपोर्टिंग करने वाले अधिकारियों पर भी सख्त निगरानी रखी जाएगी। इसे कोयला कंपनियों को हो रहे नुकसान को रोकने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

पूरी जांच प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी। तौल पर्चियों और फील्ड नोट्स पर समिति के सभी सदस्यों और वे-ब्रिज प्रभारी के हस्ताक्षर अनिवार्य होंगे। साथ ही सभी माप मेजरमेंट बुक में दर्ज किए जाएंगे। अधिकारियों का मानना है कि नई तकनीक से मानवीय त्रुटियों में कमी आएगी और उत्पादन व स्टॉक की निगरानी रीयल टाइम में अधिक सटीक तरीके से हो सकेगी।