महंगाई की मार झेल रही आम जनता को त्योहारों के मौसम में मिली थोड़ी सी राहत भी अब भारी पड़ने लगी है. अभी डेढ़ महीना भी नहीं बीता है जब सरकार ने जीएसटी (GST) दरों में कटौती करके रसोई की ज़रूरी चीजों के दाम कम किए थे, लेकिन कंपनियों ने अब उस राहत को छीनना शुरू कर दिया है. सबसे ताज़ा झटका डेयरी उत्पादों की दुनिया से आया है.
कर्नाटक के सबसे बड़े और भरोसेमंद डेयरी ब्रांड ‘नंदिनी’ (Nandini Ghee) ने अपने घी की कीमतों में ज़बरदस्त इज़ाफ़ा कर दिया है. चिंता की बात यह है कि जीएसटी घटने से कीमत में जितनी कमी आई थी, कंपनी ने उससे तीन गुना ज़्यादा की बढ़ोतरी कर दी है. इस फैसले ने उन लाखों उपभोक्ताओं को निराश कर दिया है, जो त्योहारी सीजन में मिली राहत से खुश थे. कंपनी ने इस मूल्य वृद्धि के पीछे अपनी बढ़ती लागत का हवाला दिया है.
‘राहत’ से ‘आहत’ तक- 30 रु घटे, 90 रु बढ़े
जीएसटी परिषद ने आम आदमी को राहत देने के मकसद से 22 सितंबर, 2025 से जीएसटी की नई, घटी हुई दरें लागू की थीं. इसका असर नंदिनी घी पर भी पड़ा था. जीएसटी कटौती लागू होने से ठीक पहले, नंदिनी घी की कीमत 640 रुपये प्रति लीटर थी. जब नई दरें लागू हुईं, तो उपभोक्ताओं को सीधा 30 रुपये का फायदा मिला और कीमत घटकर 610 रुपये प्रति लीटर पर आ गई. त्योहारी सीजन में यह एक बड़ी राहत थी.
लेकिन यह खुशी ज़्यादा दिन नहीं टिकी. अब कंपनी ने एक ही झटके में कीमतों में 90 रुपये प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी करने का ऐलान कर दिया है. इसका मतलब है कि जो घी उपभोक्ताओं को कल तक 610 रुपये में मिल रहा था, उसी एक लीटर घी के पैकेट के लिए अब उन्हें 700 रुपये चुकाने होंगे. अगर हिसाब लगाएं, तो जीएसटी से 30 रुपये की बचत हुई थी, लेकिन अब जेब पर 90 रुपये का अतिरिक्त बोझ डाल दिया गया है, जो उस बचत का ठीक तीन गुना है.
कंपनी ने क्यों उठाया इतना बड़ा कदम?
यह बड़ा फैसला कर्नाटक दुग्ध महासंघ (KMF) ने लिया है, जो नंदिनी ब्रांड का संचालन करता है. केएमएफ के अधिकारियों ने इस तीव्र वृद्धि को सही ठहराने की कोशिश की है.
अधिकारियों के मुताबिक, यह निर्णय अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती लागत के कारण लेना पड़ा है. उनका कहना है कि वैश्विक स्तर पर घी की मांग बढ़ रही है, जिससे कीमतें आसमान छू रही हैं. महासंघ का दावा है कि इस वैश्विक बाज़ार के रुझानों के साथ तालमेल बिठाने और अपनी आर्थिक व्यावहारिकता (Economic Viability) बनाए रखने के लिए यह बढ़ोतरी ज़रूरी हो गई थी. कंपनी ने यह भी कहा कि मूल्य वृद्धि के बावजूद, नंदिनी घी की दरें अभी भी बाज़ार में सबसे कम दरों में से हैं.
बाज़ार में बाकी बड़े ब्रांड का क्या है हाल?
जब एक बड़ी कंपनी दाम बढ़ाती है, तो यह देखना ज़रूरी हो जाता है कि बाज़ार में दूसरे खिलाड़ी क्या कर रहे हैं.
अमूल (Amul): अमूल का घी भी जीएसटी घटने के बाद 610 रुपये लीटर हो गया था, जबकि पहले यह 650 रुपये के आसपास था.
सरस (Saras): सरस घी के दाम में अक्टूबर में ही 30 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी, जिसके बाद यह 581 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है.
पतंजलि (Patanjali): पतंजलि का सामान्य घी खुदरा बाज़ार में 650 रुपये से 700 रुपये प्रति लीटर के बीच उपलब्ध है.
मदर डेयरी (Mother Dairy): मदर डेयरी का घी 641 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है.



