Vedant Samachar

Shafali Verma: टूटे बैट से प्रैक्टिस, पिता ने काटे बाल, अब जिताया वर्ल्ड कप…

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नई दिल्ली,03नवंबर : महिला वनडे वर्ल्ड कप 2025 का फाइनल भारतीय क्रिकेट के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा. इस ऐतिहासिक मुकाबले में टीम इंडिया की युवा सनसनी शेफाली वर्मा सबसे चमकती सितारा बनीं. उन्होंने न सिर्फ बल्ले से 87 रनों की विस्फोटक पारी खेली, बल्कि गेंद से भी 2 महत्वपूर्ण विकेट चटकाकर मैच की दिशा बदली. उनकी यह ऑलराउंड परफॉर्मेंस ही भारत की जीत का आधार बनी, जिसने साउथ अफ्रीका को 52 रनों से हराया. शेफाली की यह उपलब्धि किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं लगती, क्योंकि उनके क्रिकेट सफर की शुरुआत काफी साधारण और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से हुई थी.

शेफाली वर्मा कैसे बनीं क्रिकेटर?
शेफाली का जन्म हरियाणा के रोहतक में एक मिडिल क्लास में हुआ. वह साल 2013 में चौधरी बंसीलाल स्टेडियम में रणजी मैच देखने पहुंचीं थी. वहां क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर को देखते ही उनके दिल में क्रिकेटर बनने का जज्बा जाग उठा और यहीं से उनके क्रिकेटर बनने की शुरुआत हुई. घर लौटकर उन्होंने पिता संजीव वर्मा से अपनी इच्छा जाहिर की. संजीव, जो एक छोटीसी ज्वेलरी की दुकान चलाते थे उन्होंने परिवार की आर्थिक तंगी के बावजूद बेटी का हौसला नहीं तोड़ा. घरेलू खर्चों में कटौती कर उन्होंने शेफाली के लिए क्रिकेट किट मंगवाई और कोचिंग की व्यवस्था की.

प्रैक्टिस के लिए काफी चुनौतियां का किया सामना
शेफाली वर्मा के लिए प्रैक्टिस के दिनों में चुनौतियां कम नहीं थीं. ग्लव्स फट जाते, बैट टूट जाता, लेकिन शेफाली ने कभी नया सामान नहीं मांगा. पुराने उपकरणों को जोड़कर वह मैदान पर डटी रहीं. उस समय रोहतक में लड़कियों का क्रिकेट में रुझान कम था, इसलिए पिता ने अनोखा तरीका भी अपनाया. शेफाली के बाल छोटे करवाकर उन्हें लड़कों की टीम में शामिल कराया, ताकि वह बिना किसी दिक्कत के प्रैक्टिस कर सकें. आज वही छोटीसी बच्ची वर्ल्ड कप की मैच विनर बनकर उभरी है, जिसने न सिर्फ ट्रॉफी जीती, बल्कि अपनी भूमिका से पूरे मैच को यादगार बना दिया.

शेफाली की सफलता पर उनके माता-पिता संजीव वर्मा और प्रवीनबाला का सीना गर्व से चौड़ा है. वे बीसीसीआई, देशवासियों और ईश्वर का बार-बार आभार व्यक्त कर रहे हैं. उनका कहना है कि चाहे कितना भी संघर्ष करना पड़ा, उन्होंने शेफाली के लिए कोई भी दिक्कतें नहीं आने दी. जिसके चलते शेफाली अपनी मेहनत करती रही और इस मेहनत के बलबूते आज उसने पूरे देश में अपने मां-बाप का नाम रोशन कर दिया है. वह तो चाहते हैं कि बेटी किसी की भी हो वो कम नहीं होती. शेफाली की पूरी इनिंग के दौरान तो पिता संजीव वर्मा हाथ जोड़ भगवान का सिमरन करते ही नजर आए. अब वह इंतजार कर रहे हैं, कब शेफाली लौटेगी और उसका स्वागत करेंगे.

अचानक टीम में मिली जगह
बता दें, महिला वनडे वर्ल्ड कप 2025 की शुरुआत में शेफाली वर्मा टीम इंडिया का हिस्सा नहीं थीं. उन्हें स्क्वॉड में शामिल नहीं किया गया था. लेकिन सेमीफाइनल मैच से पहले प्रतीका रावल के चोटिल होकर बाहर होने के बाद उनकी टीम में एंट्री हुई. शेफाली वर्मा ने इस मौके का पूरा फायदा उठाया और फाइनल में यादगार प्रदर्शन करके इतिहास रच दिया.

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