कोरबा, 2 मई (वेदांत समाचार)। जिले की ऐतिहासिक नगरी तुमान में प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित करने के उद्देश्य से ‘ज्ञानभारतम’ राष्ट्रीय पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान के तहत व्यापक सर्वेक्षण कार्य शुरू किया गया है। कलेक्टर कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन में चल रहे इस अभियान के तहत दुर्लभ पाण्डुलिपियों की खोज, संरक्षण और डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
इसी क्रम में अभियान के जिला समन्वयक सतीश प्रकाश सिंह आज पोड़ीउपरोड़ा ब्लॉक के ग्राम तुमान पहुंचे। उन्होंने ग्राम के बुजुर्गजनों, जनप्रतिनिधियों और पूर्व राजपरिवार के वंशजों से मुलाकात कर अभियान के उद्देश्य और महत्व की जानकारी दी। साथ ही उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि उनके पास उपलब्ध प्राचीन पाण्डुलिपियों को सुरक्षित रखने के लिए ‘ज्ञानभारतम’ एप के माध्यम से उनका फोटो अपलोड कर डिजिटल संरक्षण में सहयोग करें।
सर्वेक्षण के दौरान गांव के 105 वर्षीय बिधून दास महंत और 103 वर्षीय जजमान सिंह कँवर ने अपनी स्मृतियों को साझा करते हुए तुमान के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने अपने जीवनकाल के अनुभवों और क्षेत्र की पुरानी परंपराओं से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां दीं, जिससे इस क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व को समझने में मदद मिली।
इस दौरान ग्राम पंचायत तुमान की सरपंच विमी सिंह (शालिनी) से भी जिला समन्वयक ने मुलाकात की। सरपंच ने ग्राम और पूर्व राजपरिवार के इतिहास से जुड़े अभिलेख, दस्तावेज और पाण्डुलिपियों के संरक्षण में पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि जल्द ही उनके परिवार में सुरक्षित प्राचीन दस्तावेजों और पाण्डुलिपियों को खोजकर सर्वेक्षण टीम को उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि उनका डिजिटलीकरण किया जा सके।

अभियान के तहत ग्राम के मिडिल स्कूल परिसर में आयोजित बैठक में जिला समन्वयक सतीश प्रकाश सिंह ने ग्रामीणों, शिक्षकों और विद्यार्थियों को ‘ज्ञानभारतम’ अभियान के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने उपस्थित लोगों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए यह भी बताया कि किस प्रकार मोबाइल एप के जरिए पाण्डुलिपियों का डिजिटल संरक्षण किया जा सकता है।
इस अवसर पर पोड़ीउपरोड़ा तहसीलदार विनय देवांगन, वरिष्ठ नागरिक हरि नारायण सिंह कँवर, बुढ़ान सिंह, हरि प्रसाद, प्राचार्य अल्पना तिवारी, पटवारी संतोष चौहान, कोटवार गजानंद महंत, ग्राम सचिव छत सिंह पैकरा सहित हायर सेकेंडरी स्कूल तुमान के व्याख्याता और बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं शिक्षकगण उपस्थित रहे।
यह अभियान न केवल प्राचीन पाण्डुलिपियों को नष्ट होने से बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों तक भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रूप से पहुंचाने का भी माध्यम बन रहा है।
