रायपुर,21 अक्टूबर (वेदांत समाचार)। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने भारत एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड (BALCO) की अपील को खारिज करते हुए यह स्पष्ट किया है कि कर्मचारियों की टाउनशिप को सप्लाई की गई बिजली पर चुकाए गए मुआवजा उपकर (Compensation Cess) पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ नहीं लिया जा सकता।
न्यायालय ने कहा कि टाउनशिप को दी जाने वाली बिजली की आपूर्ति “व्यवसाय के क्रम या उसके संवर्धन के लिए” (in the course or furtherance of business) नहीं मानी जा सकती। इसलिए इस गतिविधि पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा अस्वीकृत किया जाता है।
BALCO ने अपने बिजली संयंत्र से उत्पन्न बिजली का एक हिस्सा कर्मचारियों के आवासीय टाउनशिप को उपलब्ध कराया था। कंपनी का तर्क था कि यह उनके व्यावसायिक संचालन का हिस्सा है, क्योंकि यह कर्मचारियों को आवश्यक सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया है।
हालांकि, अदालत ने कहा कि कर्मचारियों को बिजली देना एक “सामाजिक या कल्याणकारी सुविधा” है, न कि कोई व्यावसायिक गतिविधि। इस वजह से इसे जीएसटी कानून की धारा 16(1) के तहत “व्यवसाय के क्रम या उसके संवर्धन” में नहीं गिना जा सकता।
इसके साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि CGST नियमों में किए गए संशोधन को पूर्व प्रभाव (retrospective effect) से लागू नहीं किया जा सकता। यानी, संशोधित नियम पुराने मामलों पर लागू नहीं होंगे।
न्यायालय ने यह भी कहा कि जब बिजली का उपभोग कंपनी के व्यवसायिक उद्देश्यों से अलग किसी अन्य उपयोग — जैसे कि टाउनशिप या कर्मचारियों के आवासीय क्षेत्र में — किया जाता है, तो उस हिस्से पर ITC का दावा नहीं किया जा सकता।
इस प्रकार, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने BALCO की अपील को खारिज करते हुए यह निर्णय दिया कि कर्मचारियों की टाउनशिप को दी गई बिजली पर GST इनपुट टैक्स क्रेडिट की अनुमति नहीं है।
मुख्य बिंदु:
टाउनशिप को दी गई बिजली “व्यवसाय के क्रम या संवर्धन” में नहीं आती।
ऐसी आपूर्ति पर ITC का दावा अस्वीकृत रहेगा।
CGST नियमों में संशोधन को पूर्व प्रभाव से लागू नहीं किया जा सकता।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने BALCO की अपील खारिज की।
