Vedant Samachar

फैमिली गिफ्ट पर नहीं लगेगा टैक्स! बहनों से मिले गिफ्ट पर भाई ने कोर्ट में जीती बड़ी लड़ाई

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फैमिली गिफ्ट के मामले में एक अहम केस सामने आया है, जिसमें एक भाई ने बहनों से मिले गिफ्ट पर आए नोटिस के मामले में केस जीत लिया है. यह फैसला गिफ्ट डीड के लिए काफी जरूरी माना जा रहा है. आइए आपको इसकी पूरी डिटेल के बारे में बताते हैं. दोनों पक्षों की दलीलों के बारे में समझाते हैं.

क्या है मामला?
आगरा के श्री माहेश्वरी को अपनी दो विवाहित बहनों से पैसे मिले थे. दिल्ली में रहने वाली एक बहन ने 2.74 करोड़ रुपये दिए और दूसरी बहन ने 6.25 लाख रुपये. इन्होंने इस रकम को अपने बिजनेस में निवेश किया. आकलन वर्ष 2016-17 के लिए ITR दाखिल करते हुए उन्होंने 10 लाख रुपये की आय दिखाई. लेकिन 19 सितंबर 2017 को धारा 143(2) के तहत नोटिस मिला और उनकी रिटर्न जांच के दायरे में आ गई. टैक्स अधिकारी ने फर्म में उनकी कैपिटल 1.8 करोड़ रुपये बढ़ने पर सवाल उठाया. इसके बाद उन्होंने सफाई दी कि ये पैसे बहनों के गिफ्ट हैं. फिर भी उनको नोटिस मिला, जिसके खिलाफ वह कोर्ट गए और वहां से अब केस जीत गए हैं.

दिल्ली वाली बहन ने प्रॉपर्टी बेचकर ये कैश दिया था, जो उसके ITR में दर्ज है. दूसरी बहन से भी 6.25 लाख का गिफ्ट मिला. उन्होंने गिफ्ट डिक्लेरेशन, बैंक स्टेटमेंट्स जैसे डॉक्यूमेंट्स पेश किए. फिर भी AO ने दिल्ली वाली बहन के 10.94 लाख और दूसरी के 6.25 लाख पर शक जताया. कहा कि प्रूफ कम हैं, इसलिए धारा 68 के तहत ये अनएक्सप्लेन्ड कैश क्रेडिट माने जाएंगे. CIT(A) ने भी AO का फैसला बरकरार रखा, क्योंकि दाता की रिटर्न स्क्रूटनी नहीं हुई और सेल डीड में कैश नहीं दिखा.

कोर्ट से हुई जीत
माहेश्वरी ने इसके खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और 30 सितंबर 2025 को उन्होंने केस जीत लिया. CA डॉ. सुरेश सुराना के मुताबिक, ITAT ने डॉक्यूमेंट्स की अच्छी तरह जांच की, जिसमें बहनों की गिफ्ट कन्फर्मेशन, दिल्ली वाली का सेल डीड, जिसमें पैसा देने वालों के बैंक स्टेटमेंट्स और करदाता के स्टेटमेंट्स शामिल थे. ITAT ने माना कि दोनों सगी बहनें हैं, इसलिए फैमिली में गिफ्ट देना नैचुरल है. दिल्ली वाली का सोर्स प्रॉपर्टी सेल से था, जहां कैपिटल गेन टैक्स भी पे किया गया. सिर्फ दाता की रिटर्न की स्क्रूटनी न होने से शक नहीं किया जा सकता, ये टैक्स डिपार्टमेंट का फैसला है, करदाता का नहीं. दूसरी बहन का गिफ्ट चेक से बैंक ट्रांसफर हुआ, स्टेटमेंट्स से प्रूफ साफ था. AO ने और जांच नहीं की, तो करदाता को ब्लेम नहीं. धारा 68 के तीनों पहलू आइडेंटिटी, क्रेडिबिलिटी और सही ट्रांजेक्शन साबित हुए.

ये रहा फैसला
बैंक चैनल्स और कन्फर्मेशन से ट्रांजेक्शन सही साबित हुआ. AO ने उपलब्ध डिटेल्स पर वेरिफिकेशन नहीं किया, इसलिए केस मजबूत रहा. ITAT ने कहा कि बहन की ओर से भाई को गिफ्ट का फैक्ट कन्फर्म है, जिसने गिफ्ट दिया है उसका सोर्स स्थापित है और स्क्रूटनी डिपार्टमेंट का काम है. गिफ्ट्स को वैलिड माना गया.

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