Vedant Samachar

ओपेक देशों ने ऑयल प्रोडक्शन बढ़ाने का किया फैसला, लेकिन भारत को नहीं होगा फायदा…

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दुनिया में चल रहे ग्लोबल टेंशन के बीच ओपेक प्लस के देशों ने भी बड़ा फैसला लिया है. ओपेक के देशों ने अक्टूबर में क्रूड ऑयल के प्रोडक्शन को बढ़ाने पर आम सहमति जताई है.अमूमन क्रूड ऑयल के प्रोडक्शन बढ़ते हैं को उनके दामों को सपोर्ट कम मिलता है. रेट थोड़े कम होते हैं. हालांकि, अभी ग्लोबल मांग में कमी के चलते ऐसा किया गया है तो यह फैसला क्रूड ऑयल के दाम को सपोर्ट करेगा. लेकिन दाम बढ़ने पर तो भारत को नुकसान होगा ही. साथ ही रेट कम होने का भी फायदा भारत को ज्यादा नहीं होगा.

ओपेक+, जिसमें पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन, रूस और अन्य सहयोगी शामिल हैं. उन्होंने अक्टूबर से तेल उत्पादन में और वृद्धि करने पर सहमति जताई है क्योंकि इसका नेता सऊदी अरब बाजार हिस्सेदारी हासिल करने के लिए प्रयासरत है, जबकि पिछले महीनों की तुलना में वृद्धि की गति धीमी है. ओपेक+ तेल बाजार को सहारा देने के लिए वर्षों की कटौती के बाद अप्रैल से उत्पादन बढ़ा रहा है, लेकिन उत्तरी गोलार्ध के सर्दियों के महीनों में तेल की अधिकता की संभावना के बीच उत्पादन को और बढ़ाने का नवीनतम निर्णय आश्चर्यजनक रूप से सामने आया है.

कितनी होगी बढ़ोतरी
ओपेक+ के आठ सदस्य अक्टूबर से उत्पादन में 137,000 बैरल प्रति दिन की वृद्धि करेंगे, जो सितंबर और अगस्त के लिए लगभग 555,000 बैरल प्रति दिन और जुलाई और जून में 411,000 बैरल प्रति दिन की मासिक वृद्धि से काफी कम है.

भारत को क्यों नहीं होगा फायदा
ओपेक देशों की ओर से अभी प्रोडक्शन बढ़ाने को मुख्य कारण है ग्लोबल डिमांड में कमी का होना. अगर डिमांड सुधरती है तो कीमतें बढ़ सकती है. इसके उलट ये भी हो सकता है कि प्रोडक्शन ज्यादा होने पर दाम कम भी जाएं. दोनो स्थितियों में भारत को ज्यादा फायदा इसलिए नहीं होगा क्योंकि इस समय देश की करेंसी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले काफी कमजोर चल रही है. रुपया 88 के पार जा चुका है. ट्रेड में भारत को आने वाले दिनों में फायदा होगा या नुकसान यह रुपये की चाल पर निर्भर करेगा. अगर रुपया टूटता है तो क्रूड ऑयल के दाम गिरने पर भी राहत नहीं मिलेगी.

भारत का क्रूड ऑयल इंपोर्ट
भारत दुनिया के सबसे ज्यादा ऑयल खरीदने वाले देशों में से एक है. यहां तेल के लिए निर्भरता काफी हद तक खाड़ी के देशों और रूस पर है. अगर डेटा की बात करें तो रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत ने साल 2023-24 में लगभग 232.5 मिलियन टन कच्चे तेल का किया. इससे साथ ही भारत की आयात पर निर्भरता 87.7% बढ़कर 1.5 अरब डॉलर हो गई. इस अवधि में कच्चे तेल का कुल आयात बिल 132.4 अरब डॉलर रहा.

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