Vedant Samachar

वेदांता एल्युमीनियम झारसुगुड़ा प्लांट में बनेगी दूसरी ऑल-वुमन लोकोमोटिव टीम

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  • कंपनी का लक्ष्य: वर्ष 2025 के अंत तक महिला लोकोमोटिव चालकों की संख्या दोगुनी करना
  • “ऑन द राइट ट्रैक” डिजिटल फिल्म लॉन्च — उद्योग में महिला नेतृत्व की नई परिभाषा

रायपुर, अक्टूबर 2025। भारत की अग्रणी एल्युमीनियम उत्पादक कंपनी वेदांता एल्युमीनियम ने झारसुगुड़ा स्थित अपने एल्युमीनियम स्मेल्टर में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने घोषणा की है कि वर्ष 2025 के अंत तक अपनी ऑल-वुमन लोकोमोटिव टीम का आकार दोगुना किया जाएगा।

वर्तमान में सात सदस्यीय टीम में छह नई महिला पेशेवरों को जोड़ा जाएगा, जिससे यह टीम 13 सदस्यों की हो जाएगी। इसके साथ ही, कंपनी ने एक दूसरी ऑल-वुमन लोकोमोटिव टीम बनाने की भी योजना बनाई है, जो प्लांट की बढ़ती लॉजिस्टिक और संचालन जरूरतों को पूरा करेगी।

महिला नेतृत्व की नई मिसाल

वेदांता एल्युमीनियम की यह पहल औद्योगिक कार्यस्थलों पर लैंगिक समानता और समावेशन को बढ़ावा देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है।
यह ऑल-वुमन टीम झारसुगुड़ा स्मेल्टर में कच्चे माल के आंतरिक परिवहन के लिए जिम्मेदार विशेष लोकोमोटिव इंजनों का संचालन और रखरखाव करती है।
ये इंजन वेदांता के 3,000 एकड़ में फैले विशाल परिसर में कच्चे माल की सप्लाई चेन का अहम हिस्सा हैं, जिसमें 1.8 एमटीपीए क्षमता वाला स्मेल्टर और 3615 एमडब्ल्यू क्षमता वाले पावर प्लांट्स शामिल हैं।

कौशल और समर्पण का उदाहरण

कंपनी के सीईओ राजीव कुमार ने इस अवसर पर कहा,

“हमारी पहली ऑल-वुमन लोकोमोटिव टीम ने साबित किया है कि कौशल, सटीकता और नेतृत्व का कोई लिंग नहीं होता। यह विस्तार केवल संख्या बढ़ाने का कदम नहीं है, बल्कि एक ऐसे भविष्य की दिशा में प्रयास है जहाँ महिलाएँ भारतीय उद्योग के संचालनात्मक क्षेत्रों में नेतृत्व कर सकें।”

उन्होंने आगे कहा कि यह पहल समावेशी कार्यसंस्कृति के निर्माण की दिशा में कंपनी की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

डिजिटल फिल्म “ऑन द राइट ट्रैक” लॉन्च

वेदांता एल्युमीनियम ने इस घोषणा के साथ ही एक नई डिजिटल फिल्म “ऑन द राइट ट्रैक” भी लॉन्च की है।
यह फिल्म भारत की पहली संपूर्ण महिला लोकोमोटिव क्रू की प्रेरणादायक यात्रा को दर्शाती है। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे ये महिलाएँ झारसुगुड़ा प्लांट के रेल नेटवर्क में समर्पण, कौशल और टीमवर्क से बदलाव की मिसाल पेश कर रही हैं।

फिल्म का एक भावुक पल दर्शकों को विशेष रूप से प्रभावित करता है, जब टीम की एक सदस्य कहती है —

“जब मैंने पहली बार ड्राइवर की सीट संभाली, तो मुझे एहसास हुआ कि मैं सिर्फ लोकोमोटिव नहीं चला रही थी, बल्कि बदलाव चला रही थी।”

एक अन्य सदस्य चित्रा धैर्य, जो एलसी गेट ऑपरेटर हैं, बताती हैं —

“शुरुआत में डर था कि महिलाएँ इतनी चुनौतीपूर्ण भूमिकाएँ कैसे निभाएँगी, लेकिन कड़ी ट्रेनिंग के बाद हमें आत्मविश्वास मिला और अब हम अपने काम पर गर्व महसूस करती हैं।”

फिल्म का अंत इस प्रेरक संदेश से होता है —

“दुनिया तभी आगे बढ़ती है जब विश्वास और संकल्प की शक्ति उसे आगे बढ़ाए।”

महिला सशक्तिकरण के प्रति कंपनी की प्रतिबद्धता

वेदांता एल्युमीनियम ने वर्षों से अपने कार्यस्थलों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं।
कंपनी के प्रमुख कार्यक्रम ‘श्रीयशक्ति’ के तहत महिलाओं को नाइट-शिफ्ट भूमिकाएँ सौंपी जा रही हैं।
साथ ही, झारसुगुड़ा प्लांट में भारत की पहली ऑल-वुमन प्रबंधित स्मेल्टर पॉटलाइन की भी शुरुआत की गई है।

कंपनी का लक्ष्य है कि 2030 तक अपने कार्यबल में 30% महिलाएँ शामिल हों, और प्रारंभिक स्तर की भर्ती में 50% महिलाओं को प्राथमिकता दी जा रही है।

उद्योग के लिए नई दिशा

वेदांता एल्युमीनियम की यह पहल केवल एक कॉर्पोरेट कदम नहीं, बल्कि भारतीय औद्योगिक क्षेत्र में लैंगिक समानता और नवाचार की नई दिशा है। झारसुगुड़ा की ये महिलाएँ अब केवल इंजन नहीं चला रहीं — वे बदलाव, आत्मविश्वास और प्रगति की रफ्तार को आगे बढ़ा रही हैं।

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