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प्रॉपर्टी खरीदने की सोच रहे हैं तो नोट कर लें ये बातें, वरना गले पड़ सकती है बड़ी मुसीबत

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घर या जमीन खरीदना सिर्फ एक सौदा नहीं, बल्कि सपना होता है. लेकिन ये सपना अगर सावधानी से न देखा जाए तो सिरदर्द भी बन सकता है. घर बनाने के लिए हो, बच्चों के भविष्य के लिए या निवेश के मकसद से जमीन लेने से पहले कुछ बुनियादी बातों की जांच जरूरी है. अगर आप भी प्लॉट खरीदने की सोच रहे हैं, तो नीचे दी गई बातें आपकी मेहनत की कमाई को डूबने से बचा सकती हैं.

जमीन पर मालिकाना हक साफ है या नहीं?
कोई भी जमीन खरीदने से पहले यह पक्का कर लें कि बेचने वाले के पास उस प्लॉट का सही मालिकाना हक है या नहीं. कई बार जमीन पर पहले से केस चल रहा होता है या किसी और का हिस्सा होता है. इस कारण भविष्य में कोर्ट-कचहरी का सामना करना पड़ सकता है. टाइटल डीड, सेल डीड और एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट जैसे कागजात जरूर जांचें और वकील की मदद लें.

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जमीन किस काम के लिए है?
भारत में हर प्लॉट की एक तयशुदा कैटेगरी होती है जैसे रिहायशी, कमर्शियल, औद्योगिक या कृषि. अगर आप घर बनाने का सोच रहे हैं और जमीन कृषि निकली, तो बाद में प्रॉब्लम हो सकती है. जरूरी है कि आप पहले ही नगर निगम या पंचायत से जोनिंग की जानकारी ले लें.

लोकेशन कैसी है?
एक अच्छी लोकेशन न सिर्फ रहने के लिए बेहतर होती है, बल्कि भविष्य में जमीन की कीमत भी तेजी से बढ़ती है. देखें कि प्लॉट के आसपास स्कूल, अस्पताल, बाजार, सड़क, मेट्रो या बस सुविधा है या नहीं. साथ ही यह भी देखें कि इलाके में कोई बड़ा प्रोजेक्ट तो नहीं आ रहा क्योंकि ऐसे क्षेत्रों में कीमतें तेजी से बढ़ती हैं.

बुनियादी सुविधाएं मौजूद हैं?
बिजली, पानी, ड्रेनेज और सीवेज जैसी बुनियादी चीजें अगर प्लॉट के आसपास नहीं हैं, तो रहने में भारी परेशानी आ सकती है. कोशिश करें कि प्लॉट ऐसी जगह हो जहां कम से कम बिजली कनेक्शन और पानी की सप्लाई सुनिश्चित हो.

प्लॉट की असली कीमत और संभावित ग्रोथ
केवल विक्रेता की बातों पर न जाएं. आसपास के इलाके में चल रही रेट और सरकारी सर्कल रेट खुद से पता करें. ऐसे क्षेत्र चुनें जहां आने वाले समय में मॉल, सड़क या मेट्रो जैसे प्रोजेक्ट्स का काम हो रहा हो.

कहीं जमीन विवादित तो नहीं?
भारत में जमीन से जुड़े कोर्ट केस आम हैं. जमीन खरीदने से पहले यह जांचना जरूरी है कि कहीं उस पर कोई कानूनी झगड़ा, पारिवारिक विवाद या कर्ज तो नहीं है। स्थानीय कोर्ट या तहसील में जाकर इसका रिकॉर्ड चेक करें।

प्लॉट की नाप और सीमाएं मिलती हैं?
कई बार जो कागज में जमीन दी जा रही होती है, असल में उसका साइज कम या अलग होता है। ऐसे में प्लॉट की फिजिकल नापजांच ज़रूर करवाएं और उसे GPS या सरकारी रिकॉर्ड से मैच करें. अगर प्लॉट किसी अप्रूव्ड लेआउट में नहीं आता, तो भविष्य में बाउंड्री हटाना या निर्माण रुकवाना जैसे मामले सामने आ सकते हैं. इसलिए लोकल डेवलपमेंट अथॉरिटी से मंजूरी वाले कागज ज़रूर जांचें.

बाढ़, मिट्टी और भूकंप ज़ोन की जानकारी
अगर प्लॉट किसी ऐसे इलाके में है जो बाढ़ ग्रस्त है या भूस्खलन क्षेत्र में आता है, तो यह जान का जोखिम हो सकता है. मिट्टी की जांच (soil test) और इलाके के भूगोल की जानकारी लेना बहुत जरूरी है.

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