मुंबई,19 सितम्बर। भारतीय रेलवे की एक अनमोल धरोहर, एशिया की पहली महिला ट्रेन ड्राइवर और वंदे भारत एक्सप्रेस की पहली महिला लोको पायलट सुरेखा यादव आज अपनी 36 वर्षों की शानदार सेवा के अंतिम चरण में प्रवेश कर गईं। 60 वर्षीय सुरेखा, जो महाराष्ट्र के सतारा जिले की रहने वाली हैं, 30 सितंबर को आधिकारिक रूप से सेवानिवृत्त हो जाएंगी। सेंट्रल रेलवे ने गुरुवार को छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) पर एक भव्य विदाई समारोह आयोजित किया, जहां सहकर्मियों, अधिकारियों और प्रशंसकों ने उन्हें सलामी दी। यह समारोह वास्तविक रिटायरमेंट से दो सप्ताह पहले रखा गया, ताकि अन्य रिटायरमेंट फंक्शन्स के साथ टकराव न हो। सुरेखा ने अपनी अंतिम यात्राओं में से एक में हजरत निजामुद्दीन-सीएसएमटी राजधानी एक्सप्रेस को इगतपुरी से चलाया, जो उनके सफर का प्रतीकात्मक समापन था।
पहली महिला लोको पायलट बनकर रची थी इतिहास
सुरेखा यादव का जन्म 2 सितंबर 1965 को सतारा में एक किसान परिवार में हुआ। इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा करने के बाद, उन्होंने 1987 में रेलवे भर्ती बोर्ड, मुंबई के इंटरव्यू के जरिए 1989 में असिस्टेंट ड्राइवर के रूप में प्रवेश किया। उस समय रेलवे का लोको पायलट विभाग पूरी तरह पुरुषों का गढ़ था, लेकिन सुरेखा ने न केवल दरवाजा खोला, बल्कि लाखों महिलाओं के लिए रास्ता बनाया। 1996 में गुड्स ड्राइवर बनीं, 2000 में मोटर वुमन, और 2010 में ‘घाट ड्राइवर’ का खिताब हासिल किया। उन्होंने सबअर्बन लोकल से लेकर गुड्स ट्रेन, राजधानी, दक्कन क्वीन और वंदे भारत जैसी प्रीमियम ट्रेनें चलाईं। 2018 में वंदे भारत एक्सप्रेस को दिल्ली से लेकर वाराणसी तक चलाने वाली पहली महिला लोको पायलट बनकर उन्होंने इतिहास रचा।
एक प्रेरणा की कहानी: बाधाओं को तोड़ने वाली योद्धा
सुरेखा के सफर की शुरुआत एक साधारण परिवार से हुई। शिक्षिका बनने का सपना देख रही थीं, लेकिन रेलवे की नौकरी ने सब बदल दिया। “मेरे माता-पिता ने कभी मुझे इस पेशे से रोका नहीं, बल्कि प्रोत्साहित किया,” उन्होंने कहा। आज भारत में लगभग 1,500 महिला लोको पायलट हैं, और सुरेखा को इसका श्रेय जाता है। सेंट्रल रेलवे के चीफ पीआरओ स्वप्निल निला ने कहा, “सुरेखा ने न केवल रिकॉर्ड बनाए, बल्कि साहस और दृढ़ता की विरासत छोड़ी, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगी।” विदाई समारोह में उन्हें सम्मानित किया गया, जहां उन्होंने कहा, “यह मेरी जिंदगी का सबसे अविस्मरणीय दिन है। रेलवे ने मुझे अपार सम्मान दिया।”
उत्तर मध्य रेलवे ने भी उनके योगदान को नमन किया, कहा कि उनका सफर महिला शक्ति और सशक्तिकरण का अमिट प्रतीक बनेगा। सुरेखा 1990 में शंकर यादव से शादी कर चुकी हैं, जो महाराष्ट्र पुलिस में इंस्पेक्टर हैं, और उनके दो बेटे हैं। रिटायरमेंट के बाद वे फिलहाल मुंबई छोड़कर छुट्टियों पर जा रही हैं, और अगले सप्ताह दस्तावेज पूरे करने लौटेंगी।



