दीपका/कोरबा, 18 सितंबर 2025। कोरबा जिले के दीपका थाना क्षेत्र से लगभग दो माह पूर्व हुई एक नाबालिग लड़की के कथित अपहरण के मामले में पुलिस की धीमी कार्रवाई पर स्थानीय असंतोष बढ़ता जा रहा है। इस प्रकरण को लेकर एक गैर-राजनीतिक संगठन ने पुलिस अधीक्षक (एसपी) को ज्ञापन सौंपा है और मांग की है कि जल्द से जल्द आरोपी की गिरफ्तारी एवं लड़की की सुरक्षित बरामदगी सुनिश्चित की जाए। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो एसपी कार्यालय का घेराव किया जाएगा और मामला उच्च संस्थानों तक पहुंचाया जाएगा।
जानकारी के अनुसार, 19 जुलाई 2025 को दीपका के विजयनगर इलाके से लगभग 14 वर्षीय नाबालिग लड़की लापता हो गई थी। इस संबंध में पीड़ित परिजनों ने 21 जुलाई को दीपका थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। परिवार का आरोप है कि लगभग दो माह बीत जाने के बाद भी कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है।
परिजनों का कहना है कि उन्हें कुछ मौकों पर लड़की से फोन पर बात करने का अवसर मिला, लेकिन उसके बाद फोन कट गया। इससे परिवार को संदेह है कि लड़की किसी अवैध गतिविधि के जाल में फंस सकती है।
परिवार ने अपनी खोजबीन के दौरान बिहार के सहरसा जिले के एक थाना क्षेत्र में भी तलाश की। वहां परिजनों को कथित रूप से सहयोग के बजाय धमकी दिए जाने का आरोप है। परिवार का कहना है कि उन्हें सलाह दी गई कि वे केवल पुलिस की मौजूदगी में ही वहां आ सकते हैं।
छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना, जो एक गैर-राजनीतिक संगठन है, ने इस मामले को गंभीर बताते हुए एसपी को पत्र लिखा है। संगठन के प्रदेश संगठन मंत्री उमागोपाल के अनुसार, उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
आरोपी की शीघ्र गिरफ्तारी और सहयोगियों पर कार्रवाई।
नाबालिग लड़की की सुरक्षित बरामदगी और परिवार को सौंपना।
मानव तस्करी की आशंका की गहन जांच।
बिहार पुलिस अधिकारियों द्वारा दी गई कथित धमकी की जांच।
मामले की प्रगति पर परिवार को नियमित जानकारी देना।
संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन की राह अपनाएंगे और मामला राज्य व राष्ट्रीय स्तर की बाल संरक्षण और मानवाधिकार संस्थाओं तक ले जाएंगे।
कोरबा एसपी कार्यालय से इस मामले में आधिकारिक बयान अभी नहीं आया है। हालांकि, दीपका थाना पुलिस सूत्रों का कहना है कि जांच जारी है और संबंधित व्यक्ति की तलाश की जा रही है।
यह घटना एक बार फिर से नाबालिगों के खिलाफ अपराधों पर चिंता बढ़ाती है। हाल ही में कोरबा जिले में ही एक अन्य मामले में अदालत ने दोषियों को कठोर सजा सुनाई थी। समाज और संगठनों की मांग है कि ऐसे मामलों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई हो, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके और समाज में भरोसा कायम रहे।



