भारत में शराब केवल नशे का जरिया नहीं, बल्कि राज्यों की कमाई का बड़ा साधन है। लगभग सारे राज्य शराब पर भारी टैक्स लगाकर प्रति वर्ष हजारों करोड़ रुपए का राज्स्व अर्जित करते है, जिसके चलते शराब की कीमतें बहुत बढ़ जाती है और शराब प्रेमियों की जेब पर इसका सीधा प्रभाव पड़ता है।
शराब खरीदना : कई तरह के टैक्स का भुगतान
हर राज्य अपनी नीति के अनुसार शराब पर एक्साइज ड्यूटी, वैट और अन्य शुल्क लगाता है। इसी वजह से ग्राहकों को शराब खरीदते वक्त उसकी असल कीमत से कई गुना ज्यादा दाम चुकाना पड़ता है।
कितना होता है टैक्स का हिस्सा ?
कई राज्यों में शराब की बोतल की कीमत का 60% से 80% हिस्सा सिर्फ टैक्स होता है। बावजूद इसके शराब पर टैक्स को लेकर न कोई बोलने वाला है और न ही शराब की ऊंची दामों पहर बिक्री रुक रही है।
तेलंगाना: शराब पर 150-250% टैक्स
महाराष्ट्र: शराब पर करीब 83% टैक्स
दिल्ली: शराब पर करीब 65-70% टैक्स
कर्नाटक: शराब पर 70% से ज्यादा टैक्स
तमिलनाडु: शराब पर 70% से ज्यादा टैक्स
उत्तर प्रदेश: शराब पर लगभग 60% टैक्स
उदाहरण से समझे टैक्स का हिसाब
अगर किसी प्रीमियम ब्रांड की बोतल की फैक्ट्री कीमत ₹200 है, तो टैक्स, डिस्ट्रीब्यूटर और रिटेल मार्जिन जोड़कर उसकी कीमत ₹400 तक पहुंच जाती है। इसमें से केवल टैक्स से ही सरकार को करीब ₹140 का मुनाफा हो जाता है।
बिना टैक्स लगाए क्या होगी कीमत ?
यदि शराब पर टैक्स हटा दिया जाए तो ₹400 में बिकने वाली बोतल सिर्फ ₹200 से 250 में खरीदी जा सकेगी। जिसका मतलब है कि शराब का दाम लगभग आधा हो जाएगा।
क्यो नहीं हटाया जाता शराब पर टैक्स ?
शराब से प्राप्त होने वाला राजस्व राज्य सरकारों की कमाई के प्रमुख स्त्रोतों में एक है। ऐसा भी कहा जा सकता है कि राज्यों में राजस्व का सबसे बड़ा स्त्रोत शराब ही है, और शराब पर टैक्स बंद करने से सरकारी कोष पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। यही वजह है की कई राज्यों में उठ रही शराबबंदी की मांग के बावजूद सरकारें राज्य में शराब बंद नहीं कर रहीं है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2022-23 में राज्यों ने शराब टैक्स से ₹2.4 लाख करोड़ का राजस्व लाभ कमाया था। यही वजह है कि शराब पर टैक्स खत्म कना लगभग नामुमकिन है।
यदि सरकार शराब से टैक्स हटा देिया जाए तो शराब की कीमत आधी तो रह जाएगी, लेकिन ऐसा करना राज्यों के लिए संभव नहीं है। क्योंकि उनकी अर्थव्यवस्था का बड़ा सहारा शराब से आने वाला टैक्स ही है।



