Vedant Samachar

बेकार कार्निया को संरक्षित कर एम्स में हो रहा नए सिरे से उपचार

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एम्स ने आईआईटी दिल्ली के साथ मिलकर कार्निया को लेकर नए विकल्पों में सफलता हासिल किया है. एम्स के राजेन्द्र प्रसाद सेंटर की चीफ डॉ राधिका टंडन ने टीवी 9 भारतवर्ष से खास बातचीच में बताया कि केंद्र ने हाल ही में मानव दाता कॉर्निया के विकल्पों की खोज की है, जिनमें जैव-संश्लेषित कॉर्निया और नव-डिज़ाइन किए गए कॉर्निएट केराटोप्रोस्थेसिस शामिल हैं. इसके अतिरिक्त, जैव-अभियांत्रिकी कॉर्निया प्रत्यारोपण के विकास के लिए आईआईटी दिल्ली के साथ सहयोगात्मक कार्य चल रहा है. इन पहलों के माध्यम से, आर.पी. केंद्र मानव दाता कॉर्निया पर निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक समाधान विकसित करने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है.

डॉ राधिका ने कहा कि अभी तक के शोध में इस क्षेत्र में काफी सफलता मिली है. उन्होंने कहा कि एम्स का आर पी सेंटर सिंथेटिक आई बनाने की दिशा में भी काफी तेजी से काम कर रहा है.

कितनी जरुरत है कार्निया की
कॉर्निया की जरूरत तब पड़ती है जब कॉर्निया क्षतिग्रस्त या विकृत हो जाती है. इसके साथ ही चश्मे या कॉन्टैक्ट लेंस से दृष्टि सुधार न हो, या जब गंभीर संक्रमण से दर्द हो रहा हो तो कार्निया बदलने की जरुरत होती है. कॉर्निया प्रकाश को केंद्रित करके देखने में मदद करता है और आँख की बाहरी परत के रूप में उसे सुरक्षित रखता है.

कैसे होता है कार्नियां ट्रांसप्लांट
कॉर्निया ट्रांसप्लांट एक सर्जिकल प्रक्रिया है जिसमें क्षतिग्रस्त कॉर्निया (आंख का पारदर्शी बाहरी हिस्सा) को एक स्वस्थ डोनर कॉर्निया से बदला जाता है. इसमें रोगग्रस्त कॉर्निया को हटाकर उसकी जगह डोनर कॉर्निया को बेहद पतले टांकों या एयर बबल से फिट किया जाता है. कभी कभी ऐसा होता है कि ट्रांसप्लांट के दौरान कुछ कार्निया खराब हो जाते हैं. इन्हीं कार्निया को बायोइंजिनीयरिंग के माध्यम से दुरुस्त कर फिर से मरीज में लगाने की प्रक्रिया एम्स ने शुरु किया है. जिसके लिए आईआईटी दिल्ली की मदद ली जा रही है.

भारत में कार्निया की जरूरत क्यों है?
भारत में प्रतिवर्ष कार्निया की जरूरत बहुत ज़्यादा है. एक आंकड़े के मुताबिक भारत में हर साल लगभग 250,000 कार्निया की जरूरत होती है. इसके साथ ही केवल 50,000 ही उपलब्ध हो पाते हैं. इसकी वजह से भारत में कॉर्निया अंधापन के कारण अंधेपन के 50,000 नए मामले हर साल जुड़ रहे हैं. इस समस्या को ठीक करने के लिए हर साल करीब 2 लाख से अधिक कार्निया प्रत्यारोपण की आवश्यकता है. इस बड़े अंतर को पाटने के लिए, नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना और सिंथेटिक नेत्र की जरुरत है.

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