Vedant Samachar

40 लाख का बीमा पाने रची ‘मौत’ झूठी कहानी, नदी किनारे कपड़े- मोबाइल और बाइक छोड़कर भागा; 4 दिन बाद मिला जिंदा…

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जांजगीर,25अगस्त (वेदांत समाचार)। जांजगीर-चांपा जिले में एक युवक ने 40 लाख रुपए के लिए अपनी मौत की झूठी साजिश रची। युवक ने खुद को मरा हुआ दिखाने का नाटक किया, ताकि उसके नाम पर 40 लाख के जीवन बीमा की राशि परिवार को मिल सके। मामला पामगढ़ थाना क्षेत्र का है।

मिली जानकारी के मुताबिक युवक का नाम कौशल श्रीवास (21) है, जो पामगढ़ के तैनाद का रहने वाला है। युवक नदी किनारे कपड़े, मोबाइल और बाइक को छोड़कर दिल्ली भाग गया था। वहां से बिलासपुर लौटा तो पकड़ा गया।

दरअसल, कौशल श्रीवास 19 अगस्त को शाम करीब 7 बजे यह कहकर घर से बाइक से निकला कि वह घूमकर आएगा। वह अपनी मां का मोबाइल लेकर निकला था, लेकिन वह लौटा नहीं।

इसी बीच करीब 9 बजे बड़े बेटे जागेश्वर श्रीवास के पास फोन आया कि उसकी बाइक और मोबाइल शिवनाथ नदी के पैसर घाट पर है।

सूचना मिलते ही परिजन मौके पर पहुंचे तो देखा कि मोटरसाइकिल, जूते और मोबाइल पुल पर पड़े थे, लेकिन कौशल का कोई सुराग नहीं लगा। इसके बाद तैनाद निवासी तिलक राम श्रीवास ने थाना पामगढ़ पुलिस में अपने छोटे बेटे 21 वर्षीय कौशल श्रीवास की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

गुमशुदगी की रिपोर्ट की रिपोर्ट के बाद बिलासपुर से SDRF और नगर सैनिकों के गोताखोरों की टीम ने चार दिन तक नदी में सर्च ऑपरेशन चलाया, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। इसी बीच, साइबर पुलिस ने युवक के सोशल मीडिया के अकाउंट की मॉनिटरिंग शुरू की।

जांच में जुटी जांजगीर की साइबर सेल टीम को सोशल मीडिया से पता चला कि कौशल जिंदा है। उसने इंस्टाग्राम पर अपने एक दोस्त को बताया था कि वह ठीक है। इसके बाद 23 अगस्त को युवक ने अपने भाई को एक अनजान नंबर से कॉल किया।

इसके बाद घरवालों ने फोन करने की जानकारी पुलिस को दी। पुलिस ने कॉल को ट्रेस किया। लोकेशन की जानकारी मिलने पर आरपीएफ और उसलापुर पुलिस को अलर्ट किया। मुखबिर की सूचना पर साइबर टीम और परिजन बिलासपुर के तोरवा इलाके पहुंचे। कौशल को सुरक्षित बरामद कर लिया गया।

इस दौरान युवक ने पुलिस को बताया कि उसके पिता पर 1 लाख रुपए का कर्ज है। वह मानसिक रूप से बहुत परेशान था। उसके नाम पर 40 लाख रुपए का बीमा था, इसलिए उसने खुद को मरा हुआ दिखाकर बीमा राशि लेने की साजिश रची थी।

युवक ने बताया कि घटना के बाद वह पैदल पामगढ़ गया, फिर बस से बिलासपुर पहुंचा। 20 अगस्त को ट्रेन से दिल्ली के फरीदाबाद पहुंचा। स्टेशन पर रात बिताई। इसके बाद 22 अगस्त को वापस बिलासपुर लौटा और 23 अगस्त को पकड़ा गया। उसने यह भी बताया कि ट्रेस से बचने के लिए उसने अपना मोबाइल स्टेशन पर फेंक दिया था।

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