इंदौर,24अगस्त । पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड (BCML) ने देश का पहला बायोप्लास्टिक (पॉलीलैक्टिक एसिड-पीएलए) प्लांट स्थापित किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ विजन को साकार करने वाली यह पहल न केवल प्रदूषण नियंत्रण में मील का पत्थर बनेगी, बल्कि भारत को बायोप्लास्टिक उत्पादन में वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाएगी।
गन्ने से बनेगा प्लास्टिक – पर्यावरण के अनुकूल विकल्प
मध्य प्रदेश के इंदौर में आयोजित ‘बायो युग ऑन द व्हील्स’ कार्यक्रम में इस प्लांट और इसके उत्पादों का प्रदर्शन किया गया। इंडियन प्लास्ट पैक फोरम के अध्यक्ष सचिन बंसल ने बताया कि गन्ने से प्राप्त चीनी को पॉलीलैक्टिक एसिड (PLA) में बदला जाता है, जिससे कप, बोतलें, कटलरी, स्ट्रॉ, खिलौने, फ्लेक्स बैनर और यहां तक कि पीपीई किट जैसे कई उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। ये उत्पाद पूरी तरह बायोडिग्रेडेबल हैं और मिट्टी में दबने के बाद स्वतः नष्ट हो जाते हैं, जिससे पर्यावरण पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ता।
आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम
अब तक पीएलए बनाने के लिए भारत को कच्चे माल का आयात करना पड़ता था, जिससे लागत काफी बढ़ जाती थी। BCML द्वारा स्थापित यह प्लांट भारत को इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएगा और उत्पादन लागत भी घटेगी। कंपनी की प्रतिनिधि श्वेता सूर्यवंशी के मुताबिक, यह उद्यम भारत के पहले औद्योगिक स्तर के बायो-पॉलीमर प्लांट की नींव रखेगा, जो सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप एक क्रांतिकारी कदम है।
उद्योग से लेकर शिक्षा जगत तक उत्साह
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उद्योगपति, शिक्षाविद, शोधकर्ता और कॉलेज के छात्र शामिल हुए। सभी ने इस पहल को भारत के लिए “गेम-चेंजर” बताते हुए सराहा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक से पारंपरिक प्लास्टिक पर निर्भरता घटेगी, पर्यावरण प्रदूषण पर रोक लगेगी और भारत को ग्रीन इकॉनमी की ओर आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।



