हिंदू धर्म में तुलसी बहुत पवित्र और पूज्यनीय मानी गई है. घर में तुलसी को माता मानकर उनकी पूजा की जाती है. भक्ति भाव से जल अर्पित किया जाता है. पौराणिक ग्रंथों में तुलसी को माता लक्ष्मी का ही रूप माना गया है. कहा जाता है कि माता लक्ष्मी तुलसी के पौधे में वास करती हैं. घर में तुलसी की पूजा करने और जल चढ़ाने से धन, सुख-समृद्धि बनी रहती है.
हालांकि, कुछ विशेष अवसर ऐसे भी होते हैं जब तुलसी पर जल चढ़ाने की पूरी तरह से मनाही होती है. इन दिनों में अगर तुलसी को जल चढ़ा दिया जाता है, तो घर में धन का प्रवाह और तरक्की रुक सकती है. सुख-शांति छिन सकती है. ऐसे में आइए जानते हैं कि ये तीन विशेष अवसर कौन से हैं और क्यों इन पर तुलसी को जल नहीं चढ़ाना चाहिए?
ग्रहण काल में
सूर्यग्रहण हो या चंद्रग्रहण, इस समय सभी कार्यों में विशेष सतर्कता बरती जाती है. भोजन में तुलसी के पत्ते डालकर उसे ग्रहण से पहले ही तैयार कर लिया जाता है, क्योंकि ग्रहण काल में भूल से भी तुलसी को जल नहीं चढ़ाना चाहिए और न ही इसके पत्ते तोड़ने चाहिए. ऐसा करना बिल्कुल शुभ नहीं माना जाता. ग्रहण का समय बहुत संवेदनशील होता है, इसलिए भूलकर भी इस समय तुलसी को जल न चढ़ाएं.
रविवार के दिन
रविवार के दिन तुलसी माता भगवान विष्णु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं. इस दिन तुलसी में जल चढ़ाने से उनका निर्जला व्रत टूट जाता है, इसलिए रविवार के दिन तुलसी को जल नहींं चढ़ाना चाहिए. इस दिन सिर्फ फूल या मनोभाव से तुलसी माता की पूजा करनी चाहिए.
एकादशी के दिन
एकादशी का दिन भी तुलसी के लिए बहुत विशेष माना जाता है. हर एकादशी पर तुलसी माता भगवान विष्णु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं. इस दिन भी जल चढ़ाने से उनका निर्जला व्रत टूट जाता है. एकादशी के दिन तुलसी माता को जल चढ़ाना अध्यामिक नियमों का उल्लंघन माना जाता है. साथ ही घर में धन, स्वास्थ्य और सुख-शांति पर इसका प्रभाव पड़ता है, इसलिए इस दिन तुलसी की पूजा बिना जल चढ़ाए करें.



