कोरबा, 04 अप्रैल (वेदांत समाचार)। शहर के रविशंकर शुक्ल नगर स्थित कपिलेश्वरनाथ मंदिर प्रांगण में आयोजित संगीतमय श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ महोत्सव के छठवें दिन शुक्रवार को भक्ति और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। टेमर सक्ती से पधारे कथाव्यास पंडित देवकृष्ण शर्मा ने अपने प्रवचन में माता-पिता की सेवा को जीवन का सर्वोच्च कर्तव्य बताते हुए कहा कि जो संतान बिना कहे माता-पिता की सेवा करती है वह सपूत कहलाती है, जो कहने पर सेवा करे वह पूत और जो कहने पर भी सेवा न करे वह कपूत कहलाता है।

उन्होंने कहा कि माता-पिता धरती पर साक्षात ईश्वर का रूप होते हैं और उनकी निस्वार्थ सेवा ही सच्चा धर्म है। व्यक्ति अपने आचरण और व्यवहार से तय करता है कि वह किस श्रेणी में आता है। प्रवचन के दौरान उन्होंने धन और लक्ष्मी के महत्व पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि लक्ष्मी का केवल पुत्र बना जा सकता है, स्वामी नहीं, क्योंकि लक्ष्मी के स्वामी केवल भगवान नारायण हैं। जो भी व्यक्ति लक्ष्मी का स्वामी बनने का प्रयास करता है, उसका अंत निश्चित रूप से विनाश में होता है।

कार्यक्रम का आयोजन बयचंद साहू एवं श्रीमती अनिता साहू द्वारा कराया जा रहा है, जिसमें प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से कथा का वाचन किया जा रहा है। पूरे क्षेत्र में इस आयोजन से भक्ति का वातावरण निर्मित हो गया है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं।
कथा के दौरान रुक्मणी-कृष्ण विवाह प्रसंग का भावपूर्ण और जीवंत वर्णन किया गया। इसी क्रम में कथा स्थल पर ही भव्य झांकी निकाली गई और बारात का आयोजन किया गया। दूल्हा बने द्वारिकाधीश के साथ बाराती नाचते-गाते कथा प्रांगण पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। इसके बाद विधिवत रुक्मणी-कृष्ण विवाह संपन्न कराया गया और हल्दी, टिकावन सहित अन्य वैवाहिक रस्में भी निभाई गईं।
इस दिव्य आयोजन में शामिल हजारों श्रद्धालु भक्ति में सराबोर होकर झूम उठे और पूरा वातावरण कृष्ण भक्ति में रंग गया।
