Vedant Samachar

रूस से तेल खरीदना बंद करना भारत के लिए नहीं होगा आसान, ये है बड़ी वजह

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नई दिल्ली,03अगस्त : अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत को रूसी तेल खरीदने से मना किया है. जिसे भारतीय ऑयल कंपनियों ने नहीं माना और तेल खरीदना जारी रखा है. लेकिन क्या आपको पता है कि अगर भारतीय निर्यात पर अतिरिक्त शुल्क या जुर्माना लगाने की अमेरिकी धमकियों से बचने के लिए भारत, रूस से कच्चे तेल का आयात बंद करता है, तो देश का वार्षिक ऑयल इंपोर्ट बिल 9-11 अरब अमेरिकी डॉलर तक बढ़ सकता है. उसके अरबों रुपये का नुकसान हो सकता है. इसलिए भारत का रूसी तेल खरीदना बंद करना आसान नहीं होगा.

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल खरीदने और आयात करने वाला देश है. फरवरी 2022 में रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर कई प्रतिबंध लगाए. इसके बाद भारत ने रूस से सस्ता तेल खरीदकर काफी फायदा उठाया. लेकिन अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय सामान पर 25% टैरिफ (शुल्क) और रूस से तेल व हथियार खरीदने पर जुर्माना लगाने की बात कही है, जिससे हालात बदल गए हैं.

तेल इंपोर्ट को होगा नुकसान
अमेरिका ने 25% टैरिफ का नोटिस जारी कर दिया है, लेकिन जुर्माने की राशि अभी तक साफ नहीं हुई है. ग्लोबल एनालिस्ट केप्लर के रिसर्चर सुमित रिटोलिया ने इसे “दोतरफा दबाव” बताया. एक तरफ यूरोपीय संघ के प्रतिबंध भारतीय रिफाइनरियों पर असर डाल रहे हैं, दूसरी तरफ अमेरिकी टैरिफ का खतरा भारत के रूसी तेल व्यापार को नुकसान पहुंचा सकता है. उन्होंने कहा कि ये कदम भारत के तेल खरीदने की आजादी को कम करते हैं, नियमों का पालन करने के जोखिम को बढ़ाते हैं और लागत में अनिश्चितता पैदा करते हैं.

केप्लर के डेटा के मुताबिक, जुलाई में भारत का रूसी कच्चा तेल आयात काफी कम हुआ. हालांकि, ये कमी कुछ हद तक रिफाइनरियों के नियमित मेंटेनेंस और कमजोर मानसून की मांग की वजह से भी हो सकती है. सरकारी रिफाइनरियों में ये कमी ज्यादा दिख रही है. निजी रिफाइनरियां भी अब तेल खरीद में अलग-अलग विकल्प तलाश रही हैं.

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