Vodafone Idea के निवेशकों को गुरुवार को बड़ा झटका लगा जब कंपनी के शेयर बीएसई पर 12% से ज्यादा गिरकर ₹8.21 पर आ गए. यह गिरावट सुप्रीम कोर्ट के लिखित आदेश के बाद आई, जिसने कंपनी को एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) बकाया पर राहत की उम्मीदों को लगभग खत्म कर दिया. हफ्ते की शुरुआत में निवेशकों को जो कानूनी राहत की उम्मीद दिखाई दी थी, वह अब काफी सीमित नजर आ रही है.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने अपने 27 अक्टूबर के आदेश में सरकार को वोडाफोन आइडिया के AGR बकाया पर पुनर्विचार करने की अनुमति दी थी. उस वक्त बाजार ने इसे कंपनी के लिए बड़ी राहत माना था. लेकिन गुरुवार को आए लिखित आदेश में कोर्ट ने साफ किया कि यह अनुमति सिर्फ वोडाफोन आइडिया के विशेष मामले पर लागू होती है और यह फैसला ‘सीमित दायरे’ में ही है. मतलब यह कि कंपनी केवल 9,450 करोड़ रुपये की अतिरिक्त AGR मांग की समीक्षा करा सकती है न कि पूरे ₹1.6 लाख करोड़ के बकाया की.
जुर्माने और ब्याज पर राहत का कोई ज़िक्र नहीं
निवेशकों की सबसे बड़ी उम्मीद यह थी कि कोर्ट ब्याज, जुर्माने और जुर्माने पर ब्याज में भी राहत दे सकता है. इससे कंपनी का वित्तीय बोझ काफी कम हो जाता. लेकिन लिखित आदेश में इन मुद्दों का कोई उल्लेख नहीं है. इससे साफ है कि अदालत का पुनर्विचार सिर्फ विवादित अतिरिक्त राशि तक सीमित है, जबकि बाकी बकाया पर कोई छूट नहीं दी गई है. यही वजह है कि बाजार का उत्साह अचानक ठंडा पड़ गया.
ब्रोकरेज हाउस की प्रतिक्रिया
ब्रोकरेज फर्म IIFL ने पहले अनुमान लगाया था कि कोर्ट का फैसला सरकार को दो बड़े विकल्प देता है या तो भुगतान की समय सीमा मार्च 2031 से आगे बढ़ाई जाए या ब्याज और जुर्माने माफ किए जाएं. लेकिन अब जब लिखित आदेश सामने आ चुका है, IIFL का मानना है कि यह राहत सिर्फ वोडाफोन आइडिया तक सीमित रहेगी और दूसरी कंपनियों जैसे भारती एयरटेल को इसका कोई फायदा नहीं मिलेगा. इसके बाद भारती एयरटेल के शेयर भी लगभग 2% गिरकर ₹2,062 पर बंद हुए.
बाजार में उम्मीद से निराशा तक का सफर
सुप्रीम कोर्ट के शुरुआती आदेश के बाद वोडाफोन आइडिया का शेयर हफ्ते की शुरुआत में 52-सप्ताह के उच्च स्तर ₹10.52 तक पहुंच गया था. निवेशकों को लगा था कि कंपनी के कर्ज और देनदारियों में बड़ी राहत मिल सकती है. लेकिन अब जब लिखित आदेश में राहत का दायरा छोटा निकला, तो वही शेयर दो दिन के अंदर लगभग पूरी बढ़त गंवा बैठा.
Vi के लिए आगे क्या रास्ता बचता है?
वोडाफोन आइडिया पर दूरसंचार विभाग (DoT) ने 9,450 करोड़ रुपये की अतिरिक्त AGR बकाया मांग लगाई थी. कंपनी का कहना है कि इसमें से करीब 5,600 करोड़ रुपये पहले ही तय अवधि से संबंधित हैं, जिनका भुगतान करने की जरूरत नहीं है. अब अदालत ने भी पुष्टि की है कि पुनर्विचार सिर्फ इसी हिस्से तक सीमित रहेगा. सरकार, जिसके पास Vi में लगभग 49% हिस्सेदारी है, अब इस मामले पर अगला कदम तय करेगी. सवाल यह है कि क्या सरकार ब्याज और जुर्माने जैसी राहत देने पर विचार करेगी या नहीं.



