कोरबा, 18 अप्रैल 2026। रेल सेवाओं की लेटलतीफी एक बार फिर यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। रायपुर से कोरबा के बीच चलने वाली हसदेव एक्सप्रेस शुक्रवार को निर्धारित समय से काफी विलंब से पहुंची, जिससे यात्रियों को भारी असुविधाओं का सामना करना पड़ा।
जानकारी के अनुसार, रायपुर से शाम 6 बजकर 5 मिनट पर रवाना होकर रात लगभग 10 बजे कोरबा पहुंचने वाली यह ट्रेन अपने तय समय से काफी पीछे चल रही थी और देर रात करीब डेढ़ बजे कोरबा रेलवे स्टेशन पहुंची। ट्रेन के विलंब से पहुंचने के कारण उसमें सवार यात्रियों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी I
रात के समय स्टेशन पहुंचने पर यात्रियों के सामने सबसे बड़ी समस्या अपने घर तक पहुंचने की रही। अधिकांश यात्रियों को ऑटो या अन्य परिवहन साधन उपलब्ध नहीं हो सके। जिन यात्रियों को ऑटो मिला, उन्हें चालकों द्वारा मनमाना किराया देना पड़ा। खासकर महिला, बुजुर्ग और बच्चों के साथ यात्रा कर रहे लोगों को अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
यात्रियों ने जताई नाराजगी
ट्रेन में सफर कर रहे यात्री राजेश कुमार ने बताया कि, “ट्रेन के इतना लेट होने की कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई, जिससे हमें स्टेशन पर लंबा इंतजार करना पड़ा। रात में पहुंचने के कारण घर जाने में काफी परेशानी हुई।”
एक अन्य यात्री पूजा सिंह ने कहा, “रात डेढ़ बजे स्टेशन पहुंचने के बाद कोई साधन नहीं मिला। मजबूरी में अधिक किराया देकर ऑटो लेना पड़ा। महिलाओं के लिए यह स्थिति काफी असुरक्षित भी रही।”
वहीं बुजुर्ग यात्री रामलाल साहू ने बताया, “हम जैसे बुजुर्गों के लिए देर रात यात्रा करना और फिर साधन न मिलना बेहद मुश्किल होता है। रेलवे को इस पर ध्यान देना चाहिए।”
रेलवे सूत्रों के अनुसार, इन दिनों विभिन्न रेलखंडों पर चल रहे मेंटेनेंस और विकास कार्यों के चलते कई ट्रेनों का संचालन प्रभावित हो रहा है। कई गाड़ियों को रद्द किया गया है, जबकि कुछ ट्रेनों को एक्सप्रेस के बजाय सीमित स्टेशनों तक लोकल की तरह संचालित किया जा रहा है। इसके अलावा कई ट्रेनों के समय में भी बदलाव किया गया है, जिससे लेटलतीफी की स्थिति बनी हुई है।
यात्रियों ने रेलवे प्रबंधन से मांग की है कि ट्रेनों की समयबद्धता सुनिश्चित की जाए और यदि किसी ट्रेन में देरी हो रही है तो इसकी पूर्व सूचना यात्रियों को उपलब्ध कराई जाए। साथ ही देर रात पहुंचने वाली ट्रेनों के यात्रियों के लिए स्टेशन पर परिवहन की उचित व्यवस्था करने की भी मांग की गई है।
