Vedant Samachar

अब जानवरों के लिए अमेरिका से चारा मगाएंगा भारत, आखिर क्या है कारण

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भारत और अमेरिका के बीच एक संभावित व्यापार समझौते की दिशा में बातचीत तेज हो गई है, और इसी क्रम में भारत अमेरिका से कुछ जीन-संशोधित (Genetically Modified – GM) प्रोसेस्ड कृषि उत्पादों के आयात को मंजूरी दे सकता है. यह रियायत ऐसे समय में सामने आ रही है जब भारत ने जीएम मक्का (कॉर्न) और सोयाबीन के आयात का अब तक विरोध किया है.

मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार, भारत कुछ ऐसे उत्पादों के आयात पर सहमति जता सकता है जो पशु चारे में इस्तेमाल होते हैं, जैसे कि सोयाबीन मील और डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स विथ सॉल्युबल्स (corn-based ethanol का एक बायप्रोडक्ट). हालांकि, ये जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है.

इंडिया US ट्रेड डील
भारत और अमेरिका के अधिकारी इन दिनों तीव्र बातचीत में जुटे हुए हैं, ताकि 9 जुलाई की डेडलाइन से पहले किसी समझौते पर पहुंचा जा सके. उस दिन से अमेरिका के उच्चतर टैरिफ लागू होने वाले हैं. इस सप्ताह की शुरुआत में अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा था कि दोनों देश एक समझौते के बहुत करीब हैं.भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने इस रिपोर्ट पर टिप्पणी के अनुरोध का तत्काल जवाब नहीं दिया.

भारत, जो कि दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है, ने अब तक जीएम मक्का और सोयाबीन के आयात की अनुमति नहीं दी है और न ही स्थानीय किसानों को इन्हें खाद्य फसलों के रूप में उगाने की मंजूरी है. कृषि क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था का एक अहम हिस्सा है और किसान एक बड़ा वोटिंग ब्लॉक माने जाते हैं, इसलिए सरकार आयात को लेकर सतर्क है ताकि घरेलू उत्पादन और किसानों की आजीविका पर कोई असर न पड़े.

क्या है मामला?
फिलहाल, सरकार जीएम खाद्य फसलों की खेती की अनुमति नहीं देती, भले ही ऐसी फसलें उत्पादन बढ़ाने में सहायक हों. जीएम सरसों की व्यावसायिक खेती को देश की शीर्ष अदालत में कानूनी चुनौती के चलते रोका गया है, और 2010 में सरकार ने जीएम बैंगन की किस्म को खारिज कर दिया था.

हालांकि, भारत अपनी वनस्पति तेल की मांग का लगभग 60% हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है, जिसमें जीएम सोया और कैनोला ऑयल शामिल हैं. इसके अलावा भारत दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा कपास उत्पादक देश है, और इसमें 90% से अधिक फसल जीएम किस्मों की होती है. व्यापार समझौते की कोशिशों के बीच भारत संभवतः कुछ सीमित जीएम प्रोसेस्ड प्रोडक्ट्स को अनुमति देने पर विचार कर रहा है, खासकर पशु आहार से जुड़े उत्पादों के लिए. हालांकि जीएम फूड को लेकर देश की सतर्क नीति अभी भी बरकरार है.

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