रायपुर,17 जुलाई (वेदांत समाचार)। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के पांचवें और अंतिम दिन सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक टकराहट देखने को मिली। महतारी वंदन योजना, राशन व्यवस्था, सामूहिक विवाह योजना और अविश्वास प्रस्ताव जैसे मुद्दों पर कांग्रेस ने साय सरकार को घेरा। महतारी वंदन योजना पर मंत्री के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस ने सदन से वॉकआउट किया, जबकि प्रश्नकाल के बाद नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सरकार के खिलाफ 136 बिंदुओं का आरोप पत्र पेश करते हुए अविश्वास प्रस्ताव सदन में रखा, जिससे सदन में सत्ता और विपक्ष आमने-सामने आ गए। सबसे ज्यादा हंगामा महतारी वंदन योजना को लेकर हुआ।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि योजना से 1.55 लाख महिलाओं के नाम हटा दिए गए, जिससे लाभार्थियों की संख्या 70.09 लाख से घटकर 68.54 लाख रह गई है। विपक्ष ने इसे सरकार की बड़ी विफलता बताते हुए जवाब मांगा। महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने सदन में स्पष्ट किया कि जिन महिलाओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, उनमें मृत्यु, ई-केवाईसी नहीं होना, आयकरदाता होना और अन्य अपात्रता जैसी वजहें शामिल हैं। हालांकि मंत्री के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस विधायकों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और सदन से वॉकआउट कर दिया। प्रश्नकाल के दौरान राशन वितरण व्यवस्था भी चर्चा का प्रमुख विषय रही।
विधायक शेषराज हरबंस ने अंत्योदय परिवारों को अतिरिक्त सात किलो चावल देने की मांग उठाई। वहीं भाजपा विधायक सुशांत शुक्ला ने आरोप लगाया कि कुछ राशन दुकानों में हितग्राहियों पर जबरन मसाले खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है। खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने कहा कि यदि इस संबंध में शिकायत और दस्तावेज उपलब्ध कराए जाते हैं तो पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इधर, मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना भी सदन में गूंजती रही। कांग्रेस विधायक अनिला भेड़िया ने सामूहिक विवाह कार्यक्रम में कथित तौर पर नकली मंगलसूत्र वितरित किए जाने का मुद्दा उठाया और सरकार से कार्रवाई की जानकारी मांगी।
इस पर मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि बालोद जिले से इस संबंध में कोई आधिकारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है, इसलिए कार्रवाई का प्रश्न नहीं उठता। प्रश्नकाल समाप्त होने के बाद नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने साय सरकार के खिलाफ 136 बिंदुओं का आरोप पत्र पेश करते हुए अविश्वास प्रस्ताव सदन में रखा। इसके साथ ही विधानसभा का अंतिम दिन सरकार और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बहस का गवाह बन गया। कांग्रेस जहां सरकार को जनहित के मुद्दों पर घेरने की रणनीति के साथ मैदान में उतरी है, वहीं सत्ता पक्ष अपनी योजनाओं और उपलब्धियों के दम पर विपक्ष के आरोपों का जवाब देने की तैयारी में है।

