2014 और फिर 2019 में पीएम मोदी के नेतृत्व में बीजेपी ने प्रचंड जीत हासिल कर सरकार बनाई. 2014 से अब तक मोदी सरकार ने किसानों के हित में कई सारे फैसले लिए हैं. इन फैसलों के जरिए किसानों की जिंदगी में सुधार हुआ है और उनकी आय भी बढ़ी है.
पीएम-किसान योजना हो या फिर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना या फिर फर्टिलाइजर के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर, किसानों के हितों को ध्यान में ध्यान में रखते हुए बनाई गई इन योजनाओं के जरिए उन्हें बहुत लाभ मिला है. आइए इन योजनाओं के बारे में डिटेल से जानते हैं.
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN)
पीएम-किसान योजना को 2019 में लॉन्च किया गया था. ये किसानों को आय मुहैया कराने वाली योजना है. इस योजना के तहत एलिजिबल छोटे और सीमांत किसानों को हर साल 6000 रुपये दिए जाते हैं. ये पैसे तीन किश्तों में मिलते हैं. इस योजना का मकसद किसानों की वित्तीय मदद मुहैया करना और उनकी आजीविका में सुधार करना है.
एग्रिकल्चरल प्रोड्यूस मार्केट कमिटी (APMC) रिफॉर्म्स
केंद्र सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम में संशोधन किया. इसके जरिए किसानों को एपीएमसी-विनियमित बाजारों के बाहर भी उपनी फसल बेचने की इजाजत दी गई. इससे एग्रिकल्चरल मार्केटिंग में सुधार हुआ. सरकार का मकसद ऐसा करके अधिक प्रतिस्पर्धा पैदा करना, बिचौलियों को खत्म करना और किसानों को उनकी उपज के लिए बेहतर मूल्य हासिल करने में सक्षम बनाना था.
सॉयल हेल्थ कार्ड स्कीम
मोदी सरकार ने 2015 में ‘सॉयल हेल्थ कार्ड स्कीम’ को लॉन्च किया. इसका मकसद किसानों को उनकी मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों की स्थिति के बारे में विस्तृत जानकारी देना है. इससे किसानों को उर्वरक इस्तेमाल के बारे में फैसला लेने में मदद मिलती है. इसका सबसे बड़ा फायदा ये मिलता है कि किसान की उत्पादकता में इजाफा होता है और लागत कम होती है.
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को 2016 में मोदी सरकार ने लॉन्च किया. ये फसल बीमा योजना है, जो प्राकृतिक आपदाओं, कीटों या बीमारियों के कारण फसल खराब होने पर किसानों को वित्तीय सहायता मुहैया कराता है. इसका मकसद किसानों के सामने आने वाले जोखिमों को कम करना और उनकी वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करना है.
E-NAM (नेशनल एग्रिकल्चरल मार्केट)
मोदी सरकार ने 2016 में ई-नाम प्लेटफॉर्म लॉन्च किया, जो किसानी से जुड़े सामानों के लिए एक ऑनलाइन इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग पोर्टल है. ये कीमत का पता लगाने के लिए पारदर्शी सुविधा देता है और कृषि उपज के लिए एक एकीकृत राष्ट्रीय बाजार बनाता है. इससे किसानों को सीधे तौर पर खरीददारों से जुड़ने का मौका मिलता है.
एग्रिकल्चरल इंफ्रास्ट्रक्चर फंड
2020 में मोदी सरकार ने एक लाख करोड़ रुपये के फंड के साथ ‘एग्रिकल्चरल इंफ्रास्ट्रक्चर फंड’ का ऐलान किया. इस फंड का मकसद कोल्ड स्टोरेज, प्रोसेसिंग यूनिट्स और गोदामों जैसे एग्रिकल्चरल इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना, फसल कटाई के बाद के प्रबंधन को बढ़ाना और बर्बादी को कम करना है.
फर्टिलाइजर के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर
मोदी सरकार ने 2018 में फर्टिलाइजर के लिए डीबीटी की शुरुआत की. इसके तहत सब्सिडी की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती है. ये फंड के गबन को कम करने और ये सुनिश्चित करने में मदद करता है कि पैसे सीधे लाभार्थियों के खाते में पहुंचे.
नेशनल एग्रिकल्चर मार्केट (e-NAM) सुधार
सरकार पारदर्शिता बढ़ाने, किसानों को व्यापक बाजार पहुंच प्रदान करने और उन्हें उनकी उपज के लिए बेहतर मूल्य हासिल करने में सक्षम बनाने के लिए ई-नाम प्लेटफॉर्म का विस्तार करने की दिशा में काम कर रही है. साथ ही इसे अन्य इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म के साथ एकीकृत करने की दिशा में भी काम चल रहा है.
फार्मर प्रॉड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन (FPOs)
सरकार फार्मर प्रॉड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन (एफपीओ) के गठन और मजबूती को बढ़ावा दे रही है. एफपीओ किसानों को सामूहिक रूप से इनपुट खरीद, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग जैसी गतिविधियों में शामिल होने में मदद करते हैं. साथ ही उन्हें बेहतर शर्तों पर बातचीत करने और प्रभावी ढंग से बाजारों तक पहुंचने के लिए सशक्त बनाते हैं.
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