रायपुर, 1 जुलाई 2026 (वेदांत समाचार)। छत्तीसगढ़ में निवेश को बढ़ावा देने और उद्योगों के लिए कारोबारी माहौल को अधिक सरल एवं पारदर्शी बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में बुधवार को मंत्रालय महानदी भवन में वरिष्ठ सचिवों की उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रस्तावित ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (डीरिग्युलेशन एंड फैसिलिटेशन) बिल-2026’ के प्रारूप और नियामकीय सुधारों से जुड़े परिचालन ढांचे पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में उद्योगों से जुड़ी सरकारी प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के साथ-साथ निवेशकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और नागरिकों तक शासकीय सेवाओं की आसान पहुंच सुनिश्चित करने के उपायों पर मंथन किया गया। सरकार का उद्देश्य राज्य में निवेश-अनुकूल वातावरण तैयार करना और उद्योगों की स्थापना की प्रक्रिया को पहले से अधिक सहज बनाना है।
चर्चा के दौरान ‘इन्वेस्ट छत्तीसगढ़’ पहल के तहत तैयार किए गए परिचालन ढांचे पर भी विस्तार से विचार किया गया। इसमें प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने, पांच प्रमुख सिद्धांतों पर आधारित कार्यप्रणाली लागू करने, 180 शासकीय सेवाओं के सरलीकरण तथा नौ विभागों को एकीकृत डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने जैसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव शामिल हैं।
मुख्य सचिव विकासशील ने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ प्रक्रियाओं के सरलीकरण, डिजिटल सेवाओं के विस्तार और निवेशकों के लिए पारदर्शी एवं सुगम व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित बिल और परिचालन ढांचा लागू होने से राज्य में निवेश की गति तेज होगी, उद्योगों के लिए कारोबार करना आसान बनेगा और नागरिकों को शासकीय सेवाएं पहले से अधिक सरल, त्वरित और प्रभावी तरीके से उपलब्ध हो सकेंगी।
बैठक में गृह एवं जेल विभाग की प्रमुख सचिव निहारिका बारिक, विधि एवं विधायी विभाग की प्रमुख सचिव सुषमा सावंत, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव अविनाश चम्पावत, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, नगरीय प्रशासन विभाग की सचिव आर. शंगीता, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद, मुख्यमंत्री एवं वाणिज्यिक कर विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
राज्य सरकार का मानना है कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल-2026 और व्यापक नियामकीय सुधारों के लागू होने से छत्तीसगढ़ में निवेश आकर्षित होगा, उद्योगों को नई गति मिलेगी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता तथा जवाबदेही भी बढ़ेगी। इससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ रोजगार के नए अवसर सृजित होने की भी उम्मीद है।

