टपकते छत और सांप-बिच्छू के डर से मिली मुक्ति... - vedantsamachar.in

टपकते छत और सांप-बिच्छू के डर से मिली मुक्ति…

सुकमा,26 जून (वेदांत समाचार) । केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं किस तरह अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के जीवन में उजाला ला रही हैं, इसकी एक सुखद तस्वीर छिंदगढ़ विकासखंड के ग्राम रेड्डीपाल में देखने को मिली है। प्रधानमंत्री आवास योजना(ग्रामीण) ने तोंदे राम और उनके परिवार को कच्चे और टपकते घर की सालों पुरानी पीड़ा से मुक्ति दिलाकर एक सुरक्षित और पक्के आशियाने का उपहार दिया है।

हर साल की लिपाई-पुताई और बारिश से मिली आजादी

ग्राम पंचायत बकुलाघाट के आश्रित ग्राम रेड्डीपाल में रहने वाले तोंदे राम पहाड़ी कोरवा एक बेहद सामान्य और मेहनतकश व्यक्ति हैं। उनके परिवार में दो बच्चे हैं, जिनका भरण-पोषण वे खेती-बाड़ी और एक छोटी सी किराना दुकान चलाकर करते हैं। सीमित आय के कारण उनका परिवार लंबे समय से एक कच्चे मकान में रहने को मजबूर था। तोंदे राम बताते हैं कि उनके पुराने कच्चे घर की छत बारिश के दिनों में टपकती थी, जिससे पूरे परिवार को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता था। हर साल घर को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें लिपाई-पुताई और मरम्मत में अपनी गाढ़ी कमाई का एक हिस्सा और समय खर्च करना पड़ता था। पक्का मकान बनाना उनके लिए एक ऐसा सपना था, जो उनकी आर्थिक स्थिति के कारण नामुमकिन सा लगता था।

पीएम आवास योजना बनी उम्मीद की किरण

ऐसे मुसीबत के समय में प्रधानमंत्री आवास योजना उनके लिए वरदान बनकर आई। योजना के तहत तोंदे राम पदामी को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के द्वारा पक्का आवास स्वीकृत हुआ। वर्तमान में उनका पक्का घर बनकर तैयार है। वह अपने परिवार के साथ इस पक्के पीएम आवास में निवास कर रहे हैं। अब उन्हें बारिश में छत टपकने और सांप बिच्छू का डर नहीं है।

अंत्योदय के संकल्प को साकार करती सुशासन की सरकार

तोंदे राम की यह खुशी और उनके चेहरे का संतोष इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कुशल नेतृत्व में राज्य सरकार की योजनाएं धरातल पर सफलतापूर्वक उतर रही हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना विशेष रूप से उन ग्रामीण और जनजातीय परिवारों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने का काम कर रही है, जो दशकों से बुनियादी सुविधाओं से वंचित थे। पक्का आवास मिलने से तोंदे राम जैसे हजारों परिवारों का न केवल जीवन सुरक्षित हुआ है, बल्कि उनके बच्चों के बेहतर भविष्य की नींव भी मजबूत हुई है।