“मैंने शकुनि की एक आँख में लेंस लगाने की सलाह दी थी:” चंदन आनंद ने सोनी सब के हस्तिनापुर के वीर में शकुनि के किरदार को लेकर कहा - vedantsamachar.in

“मैंने शकुनि की एक आँख में लेंस लगाने की सलाह दी थी:” चंदन आनंद ने सोनी सब के हस्तिनापुर के वीर में शकुनि के किरदार को लेकर कहा

मुंबई, 23 जून, 2026: सोनी सब का शो हस्तिनापुर के वीर पांडवों और कौरवों के बचपन के अनकहे किस्सों को जीवंत करता हुआ आगे बढ़ रहा है। यह शो उन रिश्तों, मूल्यों और अनुभवों को प्रदर्शित करता है, जिन्होंने हस्तिनापुर के भविष्य को आकार दिया। इस सफर में एक अहम् किरदार है शकुनि, जिसे चंदन आनंद निभा रहे हैं। शकुनि अपनी बुद्धिमत्ता, रणनीतिक सोच और ताकत के बजाए शब्दों से लोगों को प्रभावित करने की क्षमता के लिए जाना जाता है।

इस बातचीत में, चंदन आनंद शकुनि के रोल की तैयारी, किरदार के अनोखे अंदाज़ को विकसित करने, युवा कलाकारों के साथ काम करने के अपने अनुभव और ‘हस्तिनापुर के वीर’ में शकुनि के सफ़र से दर्शकों को क्या सीख मिल सकती है, इस बारे में बात करते हैं।

  1. शकुनि भारतीय पौराणिक कथाओं के सबसे रहस्यमयी और जटिल किरदारों में से एक हैं। ऐसे परतदार और गहराई वाले किरदार को निभाने के लिए आपने कैसी तैयारी की?
    तैयारी में समय लगता है और जैसे ही मुझे पता चला कि मैं शकुनि का किरदार निभाने जा रहा हूँ, मैंने उनके बारे में जितना हो सके, पढ़ना शुरू कर दिया। मैंने उन कलाकारों के अभिनय को भी ध्यान से देखा, जिन्होंने पहले शकुनि का किरदार निभाया था। अभिनय चार अहम् तत्वों पर आधारित होता है– आंगिक (शारीरिकता), वाचिक (आवाज़ और संवाद), सात्विक (भावनाएँ) और आहार्य (कॉस्ट्यूम और रूप-रंग)। शारीरिक पहलू के लिए मैंने इस पर काम किया कि शकुनि की लंगड़ाहट कितनी स्पष्ट होनी चाहिए। वाचिक पक्ष में मैंने उनके बोलने का तरीका, सुर और टोन विकसित किया। यदि आप गौर करें, तो वह अपनी बहन से अलग अंदाज़ में बात करते हैं, महाराज से अलग और बच्चों से अलग। ये बारीकियाँ तैयारी का हिस्सा थीं। मैंने शकुनि पर लिखी एक किताब भी पढ़ी, ताकि उनके सोचने के तरीके को बेहतर समझ सकूँ। एक रचनात्मक सुझाव मैंने यह दिया कि एक आँख में लेंस का इस्तेमाल किया जाए, ताकि उनके व्यक्तित्व में हल्की-सी रहस्यमय और असहज उपस्थिति दिखे। ये कुछ अहम् पहलू थे, जिन्होंने मुझे शकुनि के किरदार को गढ़ने और उसे परतदार बनाने में मदद की।
  2. ‘हस्तिनापुर के वीर’ में पांडवों और कौरवों के शुरुआती जीवन को प्रदर्शित किया गया है। इस शो में आप शकुनि का कौन-सा नया रूप दिखा रहे हैं?
    बच्चों के साथ शकुनि ज़्यादा दोस्ताना बनने की कोशिश करता है, बिल्कुल वैसे ही जैसे हमारे जीवन में वह मज़ेदार मामा या चाचा होते हैं, जो हमेशा समझते हैं, मज़ाक करते हैं और जल्दी ही सबसे पसंदीदा बन जाते हैं। यही जगह शकुनि बच्चों के बीच लेता है। जब भी बच्चे अपने सवालों या चिंताओं के साथ उसके पास आते हैं, शकुनि उसे एक मौके की तरह देखता है। ऐसे पल उसे मौका देते हैं कि वह धीरे-धीरे उनकी सोच को प्रभावित करे और हालात को अपनी मनचाही दिशा में मोड़े। हर सवाल जो बच्चे उससे पूछते हैं, शकुनि के लिए एक अवसर बन जाता है कि वह चुपचाप अपनी योजनाओं को आगे बढ़ाए और साथ ही बच्चों के सामने खुद को देखभाल करने वाला और भरोसेमंद दिखाए।
  3. शो शुरू होने के बाद से ही दर्शक शकुनि की अनोखी ताली के बारे में बातें कर रहे हैं। यह इशारा कैसे आया?
    पहली लुक टेस्ट के दौरान मुझे एक विलेन किरदार याद आया, जिसे मैंने पहले निभाया था। उस किरदार का एक खास हाथ का इशारा था, जो उसकी पहचान बन गया था। इस बार टीम ने मुझे प्रोत्साहित किया कि शकुनि के लिए भी कोई अनोखा इशारा बनाया जाए। चूँकि, शकुनि का नाम पासों और रणनीति से जुड़ा है, मैं चाहता था कि उसका इशारा उसी को दर्शाए। तभी मुझे अपने दादा जी की याद आई, जो कविताएँ सुनाते समय एक अलग अंदाज़ में ताली बजाते थे। मैंने वही इशारा शकुनि के लिए अपनाया, क्योंकि कई मायनों में उसकी सारी चालें और योजनाएँ उसके हाथों से ही नियंत्रित होती हैं। मुझे खुशी है कि दर्शकों ने इस इशारे को पसंद किया और उससे जुड़ाव महसूस किया। इसके लिए मैं अपने दादा जी का आभारी हूँ, जिन्होंने मुझे यह प्रेरणा दी।
  4. एक अभिनेता के तौर पर, क्या आपको सीधे-सादे हीरो की तुलना में नैतिक रूप से ग्रे किरदार निभाना ज़्यादा पसंद है?
    एक्टर होने के नाते हमें लचीला होना चाहिए और हर तरह की भावनाओं और किरदारों को निभाने में सक्षम होना चाहिए। मुझे अक्सर निगेटिव रोल ऑफर किए जाते हैं, लेकिन मैं उन्हें अलग नज़र से नहीं देखता। जो भी किरदार मेरे पास आता है, मेरी ज़िम्मेदारी होती है कि उसे ईमानदारी और विश्वास के साथ ज़िंदा करूँ। दिन के अंत में मेरा काम बस यही है कि किरदार को अपनी पूरी क्षमता से निभाऊँ और दर्शकों तक उसकी सच्चाई पहुँचाऊँ। चाहे किरदार पॉज़िटिव हो या निगेटिव, मेरे लिए हर रोल बराबर मायने रखता है।
  5. क्या शकुनि के लुक का कोई ऐसा पहलू था, जिसने आपको किरदार में उतरने में मदद की?
    मैं शकुनि के कॉस्ट्यूम डिज़ाइन को सचमुच बेहद पसंद करता हूँ। इसमें काला रंग प्रमुख है, जो उसके चालाक और रहस्यमयी स्वभाव को दर्शाता है। वहीं, बारीक सुनहरी डिटेलिंग उसे शाही और भव्य लुक देती है। गहने, पगड़ी और पूरा स्टाइलिंग मिलकर एक दमदार और आकर्षक रूप तैयार करते हैं। इस कॉस्ट्यूम को पहनना मेरे लिए बहुत आनंददायक रहा है और मुझे लगता है कि दर्शक भी इससे जुड़ाव महसूस कर रहे हैं। दरअसल, मुझे यह लुक इतना पसंद आया कि मैंने इसका पोस्टर भी अपनी दीवार पर लगा लिया।
  6. शो में अनुभवी और युवा कलाकारों का मिश्रण है। युवा कलाकारों के साथ आपका अनुभव कैसा रहा?
    मुझे बच्चों के साथ काम करना बेहद पसंद है, क्योंकि वे सेट पर मासूमियत और सहजता का असली अहसास लेकर आते हैं। इंडस्ट्री में दो दशक से ज़्यादा काम करने के बाद मुझे लगता है कि एक्टर के तौर पर उस बचपन जैसी क्वालिटी को बनाए रखना बहुत ज़रूरी है। सच कहूँ, तो मैं उनसे बहुत कुछ सीखता हूँ। बच्चों में कमाल की क्षमता होती है कि वे आसानी से ‘स्विच ऑन’ और ‘स्विच ऑफ’ कर लेते हैं। शॉट से ठीक पहले वे हँसी-मज़ाक करते हैं, खेलते हैं और बातें करते हैं, लेकिन जैसे ही कैमरा रोल होता है और ‘एक्शन’ कहा जाता है, वे तुरंत अपने किरदार में पूरी तरह उतर जाते हैं। उनकी यह नैचुरल सहजता और ईमानदारी वाकई काबिले-तारीफ है। ये ही गुण उन्हें अलग बनाते हैं और मुझे भी अपने अभिनय में और गहराई लाने की प्रेरणा देते हैं।
  7. आज के दर्शक शकुनि की यात्रा से कौन-से सबक ले सकते हैं?
    जब मैं कई नकारात्मक किरदारों को देखता हूँ, तो अक्सर लगता है कि ज़िंदगी का बड़ा हिस्सा बदला लेने, दूसरों का मज़ाक उड़ाने और लगातार षड्यंत्र रचने में ही बर्बाद हो जाता है। शकुनि हमारी पौराणिक कथाओं में इसका सबसे मज़बूत उदाहरण है। व्यक्तिगत तौर पर मैं इस सोच से खुद को जोड़ नहीं पाता। असल ज़िंदगी में मैंने ऐसे लोगों को देखा है, लेकिन मुझे नहीं लगता कि यह रास्ता शांति या खुशी देता है। मैं मानता हूँ कि इंसान को दयालु, खुशमिज़ाज और माफ करने वाला होना चाहिए। जब हम गलतियों को छोड़ना सीखते हैं और मन में बैर नहीं रखते, तो ज़िंदगी कहीं ज़्यादा हल्की, आसान और खूबसूरत हो जाती है।

सोनी सब पर देखिए हस्तिनापुर के वीर, हर सोमवार से शनिवार रात 9:00 बजे।