सक्ती, 17 जून (वेदांत समाचार)। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के जैजैपुर क्षेत्र में प्रस्तावित एक बड़े डोलोमाइट खनन प्रोजेक्ट पर प्रशासन ने फिलहाल रोक लगा दी है। ग्राम झालरोंदा में प्रस्तावित इस खनन परियोजना की 17 जून को होने वाली जनसुनवाई को कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी ने आगामी आदेश तक स्थगित कर दिया है। इस फैसले के बाद माइनिंग प्रोजेक्ट और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
यह मामला छत्तीसगढ़ रिसोर्सेस प्रा. लि. की 9.589 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रस्तावित डोलोमाइट खनन परियोजना से जुड़ा है। कंपनी की योजना ग्राम झालरोंदा (तहसील भोथिया) क्षेत्र में प्रति वर्ष लगभग 3.5 लाख टन से अधिक डोलोमाइट के उत्खनन की थी। पर्यावरणीय स्वीकृति (Environmental Clearance) की प्रक्रिया के तहत 17 जून को धान खरीदी केंद्र झालरोंदा में जनसुनवाई प्रस्तावित थी, जिसमें स्थानीय ग्रामीणों और प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में परियोजना पर चर्चा होनी थी।
हालांकि जनसुनवाई की तारीख नजदीक आते ही इस परियोजना के खिलाफ कई शिकायतें सामने आईं। जिला कांग्रेस कमेटी सक्ती के महामंत्री विजय सूर्यवंशी, अभिषेक राय और दिलीप मिरी सहित कई शिकायतकर्ताओं ने कलेक्टर को आवेदन देकर परियोजना पर गंभीर सवाल उठाए। शिकायतों में आरोप लगाया गया कि प्रस्तावित खनन क्षेत्र में शासकीय भूमि और पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र शामिल है।
शिकायतों के आधार पर राजस्व विभाग द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में खसरा नंबरों और भूमि रिकॉर्ड को लेकर कई अनियमितताएं सामने आने की बात कही गई है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार शुरुआती जांच में कुछ भूमि को लेकर स्थिति अस्पष्ट और संदिग्ध पाई गई, जिसमें सरकारी जमीन, वन भूमि और अन्य प्रतिबंधित श्रेणियों के शामिल होने की आशंका जताई गई है।
इन्हीं प्राथमिक तथ्यों को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर ने जनसुनवाई को स्थगित करने का निर्णय लिया है। आदेश में कहा गया है कि जब तक राजस्व अभिलेखों की विस्तृत जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी भी प्रकार की आगे की प्रक्रिया को रोकना आवश्यक है ताकि किसी प्रकार का विवाद या त्रुटि उत्पन्न न हो।
इस प्रशासनिक निर्णय के बाद पूरे क्षेत्र में माइनिंग प्रोजेक्ट के भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। ग्रामीणों, पर्यावरण से जुड़े संगठनों और उद्योग जगत की नजर अब राजस्व विभाग की अंतिम जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है।
यदि जांच में यह स्पष्ट होता है कि प्रस्तावित खनन क्षेत्र में सरकारी या वन भूमि शामिल है, तो इस बहु-करोड़ डोलोमाइट प्रोजेक्ट पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। फिलहाल प्रशासन ने मामले को गंभीर मानते हुए पूरी प्रक्रिया को रोककर विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं।
अब सभी की नजरें आने वाली जांच रिपोर्ट और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं, जो इस माइनिंग प्रोजेक्ट के भविष्य का फैसला तय करेगा।

