वॉशिंगटन,22 मई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान को लेकर एक बड़ा बयान जारी किया है। उन्होंने ईरान को कड़ी चेतावनी देने के साथ-साथ बातचीत से मसले सुलझाने की बात भी कही है। ट्रंप प्रशासन ने साफ कर दिया है कि वे तेहरान को किसी भी हाल में परमाणु हथियार बनाने या रखने की इजाजत नहीं दे सकते। यह बयान ऐसे समय में आया है जब खाड़ी क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाली तेल की सप्लाई को लेकर पूरी दुनिया में चिंता बनी हुई है और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा जारी है। इस बीच, विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत के दौरे पर निकलने से पहले मियामी एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बात की। उन्होंने ईरान को सख्त लहजे में चेतावनी दी।
रुबियो ने कहा कि अगर ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर किसी भी तरह का टोल या शुल्क लगाने की कोशिश की, तो अमेरिका इसे कभी स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि समुद्र के इस रास्ते पर टोल सिस्टम बिल्कुल मंजूर नहीं है। अमेरिका इस मामले में बहरीन की ओर से लाए गए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव का पूरा समर्थन कर रहा है। इस प्रस्ताव को दुनिया के 100 से ज्यादा देशों का साथ मिला है, जो सुरक्षा परिषद के इतिहास में एक बड़ी बात है। रुबियो ने कहा कि दुनिया में कोई भी टोल सिस्टम के पक्ष में नहीं है। अगर ईरान इस दिशा में आगे बढ़ता है, तो किसी भी कूटनीतिक समझौते तक पहुंचना बहुत मुश्किल हो जाएगा। इसके बाद व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति ट्रंप ने भी अपनी बात रखी। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अमेरिका का पूरा नियंत्रण है। उन्होंने इसे ‘स्टील की दीवार’ जैसा मजबूत बताया। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका की मर्जी के बिना वहां से कोई भी जहाज नहीं गुजर सकता। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान की सैन्य ताकत को भारी नुकसान पहुंचा है।
ट्रंप के अनुसार, अमेरिका ने ईरान की नौसेना और वायुसेना को पूरी तरह खत्म कर दिया है। साथ ही ईरान की ज्यादातर मिसाइल क्षमता भी अब खत्म हो चुकी है। ट्रंप ने परमाणु हथियारों के मुद्दे को अपनी सरकार की सबसे बड़ी विदेश नीति प्राथमिकता बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान परमाणु हथियार हासिल कर लेता है, तो मध्य पूर्व में परमाणु युद्ध छिड़ सकता है। इस युद्ध की आग अमेरिका और यूरोप तक भी पहुंच सकती है। ट्रंप ने कहा कि वे बातचीत का रास्ता खुला रखे हुए हैं, लेकिन अगर जरूरत पड़ी तो सैन्य कार्रवाई का विकल्प भी मौजूद है। उन्होंने दो टूक कहा कि या तो वे यह सुनिश्चित करेंगे कि ईरान के पास परमाणु हथियार न हों, वरना अमेरिका को कोई बहुत बड़ा कदम उठाना पड़ेगा। मार्को रुबियो ने भारत के साथ रिश्तों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत एक बेहतरीन सहयोगी और साझेदार है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव के कारण भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को लेकर चिंतित है। रुबियो ने भरोसा दिलाया कि अमेरिका भारत को उसकी जरूरत के मुताबिक ऊर्जा बेचने के लिए तैयार है। अपनी भारत यात्रा के दौरान वे ऊर्जा सहयोग और क्वाड (Quad) समूह की बैठकों में हिस्सा लेंगे।

