जांजगीर चांपा 21 मई 2026। छत्तीसगढ़ प्रदेश का जांजगीर चांपा जिला भीषण गर्मी से पेयजल की संकट से जूझने लगा है जहां तमाम कोशिशें के बाद भी लोगों को पीने के लिए पानी पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पा रहा है यह संकट गर्मी मौसम के प्रारंभिक समय में देखने को मिल रहा है अभी मई, जून का महीना बाकी है और किस हद तक लोगों को इसके लिए संघर्ष करना पड़ेगा यह चिंता का विषय है।
पिछले 10 वर्षों में यहां की आबादी तेजी से बढक़र दो गुनी हो गई है। इसके मुकाबले सुविधाओं में बढ़ोतरी उतनी नहीं हो पाई है। वर्तमान समय में पेयजल संकट, पानी के लिए लगी लंबी कतारें, सूखे तालाब से जुड़ी खबरें अब समाचार-पत्रों की सुर्खियां बन रही हैं। जो चिंता का विषय हैं। जिले के अधिकतर तालाब सूख चुके हैं लोगों की लपरवाही सरपंच,पंचों की उदासीनता के कारण ग्रामीण क्षेत्र में तालाबों को नहीं भरा जा सका। अभी कुछ दिन पहले तक नहर से पर्याप्त मात्रा में पानी बहते रहा है जिसके कारण पानी का लेवल ठीक-ठाक रहा है किंतु जैसे ही नहर की धार रुकी है वैसे ही धरती के अंदर वाटर लेवल में लगातार गिरावट आने लगा है ऐसे में लगातार हैंड पंप के हलक सूखने लगे हैं। अनेक ग्राम पंचायत में तालाब गहरीकरण का कार्य किया जा रहा है जिसके कारण तालाबों को पानी से खाली कर दिया गया है ताकि आने वाले समय में अधिक मात्रा में पानी का भराव किया जा सके वहीं जिन गांवों में तालाब गहरीकरण का कार्य नहीं हो रहा है वहां तालाबों को भरने में लोगों द्वारा घोर लापरवाही की गई है जिसके कारण उक्त तालाबों का पानी गंदा एवं बदबू युक्त होने के कारण अनुपयोगी हो गया है हालत यह है कि 3 ग्राम पंचायत में संचालित हैंडपंप का वाटर लेवल लगातार गिरने लगा है और लोगों को पीने के पानी के लिए मस्कट करनी पड़ रही है। नगर पालिका चांपा में हसदेव नदी एवं रामबांधा तालाब होने के बाद भी 400 फीट खुदाई के बाद भी पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है इसी तरह तेरा नवागढ़, सुकली, तुलसी, गोविंदा पोड़ीशंकर, धुरकोट, धनेली और कचंदा, पामगढ़, खपरी, किरारी,अकलतरा, नरियरा, मुलमूला, बलौदा पतोरा, पहाडिय़ा, ग्रामों में जलस्तर काफी नीचे जा चुका है जो भविष्य के लिए आईना दिखाने को काफी है।
जिस तेजी से जिले में जंगलों का विनाश हो रहा है तथा कॉलोनी का विकास हो रहा है, यहां आबादी और कॉलोनियों की संख्या बढ़ रही है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पानी की समस्या के लिए अगर समय रहते ठोस उपाय नहीं किए गए तो स्थिति कितनी गंभीर हो सकती है।
तालाब जो कि प्राकृतिक जलस्रोत का बेहतर माध्यम हैं और गर्मी के दिनों में पेयजल की कमी पूरी करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। देखरेख के अभाव में यह तालाब दम तोड़ रहे हैं। वहीं, नगर पालिका के सभी वार्डों का भूजल स्तर लगभग 400 फीट तक नीचे चला गया है। यह सारी लापरवाही बताने के लिए काफी है कि समुचित उपाय नहीं किए जाने के कारण हर साल पेयजल संकट गंभीर होता जा रहा है। इससे बचाव के लिए जरूरी है कि योजनाएं सिर्फ कागजों तक ही सीमित न रहे। जांजगीर,चांपा शहर में गर्मी शुरू होते ही टैंकरों से पानी वार्ड तक पहुंचाने का कार्य किया जाता है यह आपूर्ति भी पर्याप्त नहीं होता क्योंकि आबादी लगातार बढ़ती जा रही है। जांजगीर शहर के भीमा तालाब को भरने के लिए पालिका द्वारा अब तक करोड़ों रुपए खर्च किया जा चुका है वही इस मुहिम में जो ठेकेदार
काम लिए वे सभी के सभी मालामाल हो गए हैं किंतु भीमा तालाब का ना तो भराव किया जा सका है और ना ही साफ सफाई को लेकर कोई गंभीर है। अधिकारी अपने एसी वाले केबिन से निकलकर मैदान में उतरें और लापरवाहों पर सख्त कार्रवाई करें। पानी का दुरुपयोग करने वालों पर जुर्माना लगाने के साथ ही सभी को वाटर हार्वेस्टिंग के लिए अनिवार्य रूप से निर्देश दें। क्योंकि आने वाला समय और भैयावह हो सकता है।

