Vedant Samachar

39 हजार 551 हेक्टेयर में अनाज और दलहन-तिलहन की हुई फसल जिले में…

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कोरबा,22 मार्च (वेदांत समाचार)। लंबे समय से अपने खेतों में एक ही जैसी फसल लेने और लाभ का मार्जिन न बढऩे के मामले में सोच विचार के बाद कृषक समुदाय ने नया आइडिया पर ध्यान दिया। नगद और नई फसलों की तरफ उन्होंने रूचि दिखाई और काम भी किया। फसल चक्र परिवर्तन करने से उनके सामने अच्छी संभावनाएं भी आई और लाभ भी हुआ। अब तक की स्थिति में जिले में रबि सीजन के अंतर्गत अनाज से लेकर दलहन-तिलहन की अच्छी फसल ने किसानों को खुश किया है।

कृषि विभाग ने जिले के पांच विकासखंडों के अंतर्गत श्रेणीगत फसलों के लक्ष्य तय किया था। सूचनाओं के अनुसार कुल लक्ष्य 40 हजार 730 हेक्टेयर के विरूद्ध 39 हजार 551 हेक्टेयर में अनाज और दलहप-तिलहन पर काम किया गया है। इनमें सब्जी व अन्य फसलें भी शामिल हैं। रबि सीजन 2025-26 के लिए विकासखंड कोरबा में अनाज श्रेणी में 592 हेक्टेयर के सापेक्ष्य 492 हेक्टेयर की लक्ष्य पूर्ति हुई है। करतला में 640 के सामने 495 हेक्टेयर का आंकड़ा मौजूद है।

कटघोरा में परिणाम उत्साहजनक होना बाकी है। वर्तमान में यहां काम 274 हेक्टेयर में हो सका है। पाली ब्लाक में 1407 हेक्टर के विरूद्ध। 1292 हेक्टेयर और पोड़ी उपरोड़ा में 703 के विरूद्ध 689 हेक्टेयर में लक्ष्य पूर्ति हो सकी। इन्हीं विकसखंडों में चना, मटर, मसूर, तिवड़ा, उड़द जैसी दलहन फसलों के लिए कुल लक्ष्य 8088 हेक्टेयर रखा गया था। इसके मुकाबले 7644 हेक्टेयर में लक्ष्य पूर्ति हुई है। तिलहन श्रेणी में पांच विकासखंडों में किसानों द्वारा सरसो, तोरिया, अलसी, कुसूम, मूंगफली और सूर्यमुखी का उत्पादन करने में काफी रूचि ली गई। यहां पर 10 हजारर 360 हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया। इसमें से 10 हजार 054 हेक्टेयर में इनका उत्पादन किया गया है।

सब्जी और अन्य फसलों के मामले में काफी अच्छे नतीजे सामने आये और सबसे खास बात यह रही कि कुल लक्ष्य से ज्यादा क्षेत्र में किसानों ने उत्पादन करने में ध्यान दिया। विभाग ने 18 हजार 540 हेक्टेयर का लक्ष्य सामने रखा था। इससे आगे जाते हुए 18 हजार 671 हेक्टेयर में सब्जी की खेती करने में किसानों ने अपने आपको प्रदर्शित किया। ये दिखाता है कि आर्थिक लाभ के लिए उनकी इच्छा शक्ति काफी अच्छी है। बताय गया कि कोरबा जिले में धान की फसल मुख्य रूप से ली जाती है लेकिन उत्पादकों ने समृद्धि के लिए दूसरे विकल्पों के लिए भी ध्यान दिया है।


मूंगफली उत्पादन पर दिलचस्पी


दलहन-तिलहन की फसलें अधिक लाभ देने वाली है क्योंकि इनका उपयोग लगातार होता है और इन कारणों से हमेशा मांग होना स्वाभाविक है। कोरबा जिले में मूंगफली का रकबा इसलिए भी बढ़ रहा है। कृषि विभाग सरकार की योजनाओं के तहत किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने में आगे है।

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