Vedant Samachar

झारखंड में 227 किलो का अमेरिकी बम, द्वितीय विश्व युद्ध से जुड़ा होने की आशंका; सेना करेगी निष्क्रिय

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जमशेदपुर,20 मार्च । झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले में सुवर्णरेखा नदी के किनारे एक भयावह खोज ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। रेत के अवैध खनन के दौरान मजदूरों को करीब 227 किलोग्राम (500 पाउंड) वजनी एक विशाल अमेरिकी बम मिला है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह द्वितीय विश्व युद्ध के समय का अनएक्सप्लोडेड बम है, जो दशकों से मिट्टी में दबा हुआ था।

खुदाई के दौरान हुआ खुलासा

नदी तट पर बालू खोदते समय मजदूरों को अचानक एक लोहे का बड़ा टुकड़ा दिखाई दिया। गहराई तक खुदाई करने पर गैस सिलेंडर जैसे आकार का बम सामने आया। ग्रामीणों ने तुरंत सूचना दी, जिसके बाद पुलिस और प्रशासन सक्रिय हो गए। बम पर स्पष्ट रूप से ‘AN-M64’ मॉडल और ‘मेड इन अमेरिका’ अंकित है, जो इसके अमेरिकी मूल की पुष्टि करता है।

बम की खतरनाक क्षमता, सेना बुलाई गई

स्थानीय बम निरोधक दस्ते ने मौके पर जायजा लिया तो इसकी जटिलता और विनाशकारी क्षमता देखकर हाथ खड़े कर दिए। दस्ते के सदस्यों ने बताया कि यह बेहद खतरनाक विस्फोटक है, जिसे केवल सेना के विशेषज्ञ ही सुरक्षित रूप से निष्क्रिय (डिफ्यूज) कर सकते हैं। इसके लिए रांची से विशेषज्ञ टीम बुलाई जा रही है और क्लाइकुंडा एयरबेस को भी पत्र भेजा गया है।

द्वितीय विश्व युद्ध से संभावित संबंध

जानकारों का मानना है कि यह बम द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इस्तेमाल नहीं हुआ और फटने से बच गया। क्षेत्र के महुलडांगरी के पास अतीत में एक लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त होने की घटना हुई थी, जिसमें यह बम शामिल हो सकता है। नदी की नरम मिट्टी में धंसने के कारण उस समय विस्फोट नहीं हुआ और दशकों तक सुरक्षित रहा।

प्रशासन ने सील किया क्षेत्र, सख्त चेतावनी

बहरागोड़ा थाना प्रभारी ने पूरे क्षेत्र को सील कर दिया है और ग्रामीणों को सख्त हिदायत दी है कि वे बम के पास न जाएं और न ही छेड़छाड़ करें। अगर बम फटता तो कई सौ मीटर के दायरे में भारी तबाही मच सकती थी। सुरक्षा घेरे का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी जारी की गई है।

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