Vedant Samachar

60 की जगह 90 फ्लैट का नक्शा पास बिल्डर और अफसरों पर मिलीभगत का आरोप, बिल्डिंग ऑफिसर बोले- पहले मिल चुकी थी अनुमति…

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बिलासपुर,15मार्च (वेदांत समाचार) : बिलासपुर में नगर निगम और नगर ग्राम निवेश (T&CP) के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। मामला शहर के तालापारा (अज्ञेय नगर) स्थित ‘मेसर्स अनंत रियाल्टी’ प्रोजेक्ट से जुड़ा है, जहां नियमों का उल्लंघन कर निर्माण किए जाने का आरोप लगा है।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब छत्तीसगढ़ विधानसभा के प्रश्नकाल में बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र के 177 अवैध संस्थानों का मुद्दा चर्चा में है। इस पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने जांच कमेटी गठित करने की घोषणा की है।

‘मेसर्स अनंत रियाल्टी’ प्रोजेक्ट में बिल्डर नमन गोयल और कुछ अधिकारियों की कथित मिलीभगत से नियमों का उल्लंघन किए जाने की बात कही जा रही है। इससे शासन को करोड़ों रुपए के नुकसान और आम लोगों की सुरक्षा से समझौता होने की आशंका जताई जा रही है।

एरिया स्टेटमेंट और नक्शे में बड़ा अंतर

मामले का मुख्य बिंदु एरिया स्टेटमेंट और स्वीकृत नक्शे के बीच अंतर है। बिल्डर नमन गोयल ने अनुमोदित अभिन्यास के एरिया स्टेटमेंट में 4 तलों पर 60 फ्लैट निर्माण का उल्लेख किया था। हालांकि उसी अभिन्यास के नक्शे में फ्लैट की संख्या बढ़ाकर 90 और तलों की संख्या 6 कर दी गई। इसके बावजूद नक्शा पास कर दिया गया।

नगर निगम के बिल्डिंग ऑफिसर अनुपम तिवारी ने बताया कि T&CP के संयुक्त संचालक बीपीएस पटेल और उनकी टीम मामले की जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि यह नक्शा उनके कार्यभार संभालने से पहले का है।

अनुपम तिवारी के अनुसार, मौके पर मौजूद सड़क की चौड़ाई के अनुसार 90 फ्लैट बनाने की अनुमति कैसे दी गई, यह जांच का विषय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि टाउन प्लानिंग से पहले अनुमति मिली थी, उसी आधार पर नगर निगम ने नक्शा पास किया।

संयुक्त संचालक का जवाब नहीं मिला

मामले की जांच कर रहे संयुक्त संचालक बीपीएस सिंह से उनका पक्ष जानने के लिए कॉल किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। उन्हें मैसेज भी भेजा गया, फिर भी इस विवादित मामले में कोई जवाब नहीं मिला।

नक्शा पास कराने फर्जी इंजीनियर का सहारा

प्रोजेक्ट का नक्शा ‘विकास सिंह’ नाम के एक इंजीनियर के माध्यम से तैयार कराया गया। जांच में पता चला कि बिलासपुर में इस नाम का कोई आर्किटेक्ट या इंजीनियर मौजूद नहीं है। इस नाम का उपयोग फर्जी तरीके से नक्शा पास कराने के लिए किया गया।

पहले भी इसी नाम का उपयोग कर कई अवैध निर्माणों के नक्शे स्वीकृत कराए गए थे। इसके बाद नगर निगम ने इस कथित इंजीनियर का लाइसेंस निलंबित कर दिया था। इसके बावजूद उसी निलंबित पहचान पर नया बड़ा प्रोजेक्ट पास हो जाना विभागीय मिलीभगत की आशंका को मजबूत करता है।

झूठे शपथ पत्र के आधार पर मिली अनुमति

नियमों के अनुसार बड़े प्रोजेक्ट में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए फ्लैट आरक्षित करना अनिवार्य होता है। बिल्डर ने शपथ पत्र में उल्लेख किया कि ग्राम तिफरा के खसरा नंबर 407/7 में EWS फ्लैट बनाए जाएंगे।

बिल्डर और अफसरों पर एफआईआर की मांग

मामला सामने आने के बाद बिल्डर नमन गोयल और जिम्मेदार अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग उठने लगी है। मांग की गई है कि प्रोजेक्ट की विकास अनुज्ञा और भवन अनुमति तत्काल प्रभाव से निरस्त की जाए, ताकि आम लोगों को किसी प्रकार की धोखाधड़ी से बचाया जा सके।

मामले की लिखित शिकायत की गई

मामले की लिखित शिकायत गोपाल नाम के आवेदक ने संचालक नगरीय प्रशासन, संचालक नगर ग्राम निवेश, कलेक्टर बिलासपुर और नगर निगम आयुक्त को भेजी है।

शिकायत में बिल्डर, उसके भागीदार, नक्शा तैयार करने वाले कथित इंजीनियर और नगर निगम व T&CP के जिम्मेदार अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। साथ ही 25 जून 2025 को जारी विकास अनुज्ञा निरस्त कर निर्माण कार्य रोकने की भी मांग की गई है।

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