Vedant Samachar

कर्ज में डूबी वोडाफोन-आइडिया की बदलेगी किस्मत! हिस्सेदारी खरीदने मैदान में उतरे बड़े उद्योगपति

Vedant Samachar
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भारी कर्ज और घाटे से जूझ रही वोडाफोन आइडिया की स्थिति में अब एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. दरअसल, भारत के जाने-माने जेएसडब्ल्यू (JSW) ग्रुप और सिंगापुर की एसटी टेलीमीडिया (ST Telemedia) सहित कई घरेलू और विदेशी निवेशकों ने इस टेलीकॉम कंपनी में हिस्सेदारी खरीदने की गंभीर इच्छा जताई है. वोडाफोन आइडिया पिछले काफी समय से गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रही है. लेकिन, कंपनी के सबसे बड़े शेयरधारक के रूप में केंद्र सरकार द्वारा दी गई भारी वित्तीय राहत के बाद, अब बड़े निवेशकों का ध्यान इस कंपनी की ओर वापस लौटने लगा है.

इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ये बातचीत अभी शुरुआती और अन्वेषणात्मक दौर में है. सौदे को लेकर कोई अंतिम मुहर नहीं लगी है. जेएसडब्ल्यू और एसटी टेलीमीडिया के अलावा, अमेरिका की ‘टिलमैन ग्लोबल होल्डिंग्स’ और कुछ अन्य बड़े भारतीय औद्योगिक घराने भी कंपनी में हिस्सेदारी खरीदने की रेस में शामिल हैं. निवेश जुटाने की इसी कड़ी में 16 और 17 मार्च को कंपनी का शीर्ष प्रबंधन सिंगापुर और हांगकांग में बड़े संस्थागत निवेशकों के साथ बैठकें करने जा रहा है.

क्या प्रमोटर्स अपना हिस्सा बेचेंगे या जारी होंगे नए शेयर?
वर्तमान में वोडाफोन आइडिया में सरकार की लगभग 49 फीसदी हिस्सेदारी है. सरकार लंबे समय से एक ऐसे रणनीतिक निवेशक की तलाश में है जो कंपनी में न सिर्फ पर्याप्त पूंजी लगाए, बल्कि इसके कामकाज को भी सुचारू रूप से चला सके. फिलहाल कंपनी के मुख्य प्रमोटर्स में आदित्य बिड़ला ग्रुप (9.50% हिस्सेदारी) और ब्रिटेन की वोडाफोन ग्रुप पीएलसी (16.07% हिस्सेदारी) शामिल हैं. हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि नए निवेशक के आने पर मौजूदा प्रमोटर्स अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे या बाजार में फ्रेश इक्विटी (नए शेयर) जारी किए जाएंगे.

50 हजार करोड़ का निवेश
ब्रोकरेज फर्म ‘आईआईएफएल (IIFL) सिक्योरिटीज’ के अनुमानों पर गौर करें, तो रणनीति काफी दिलचस्प नजर आती है. यदि कोई रणनीतिक निवेशक कंपनी में 50,000 करोड़ रुपये की नई पूंजी डालता है, तो सरकार कंपनी की 48,000 करोड़ रुपये की स्पेक्ट्रम देनदारी को इक्विटी में बदल सकती है. राहत की बात यह है कि ऐसा करने पर भी सरकार की हिस्सेदारी 49 प्रतिशत की सीमा को पार नहीं करेगी, जबकि कंपनी का स्पेक्ट्रम कर्ज 40 प्रतिशत तक कम हो जाएगा.

इसके अतिरिक्त, सरकार एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) पर आधारित कंपनी के वैधानिक बकाये का भी पुनर्मूल्यांकन कर रही है. मार्च के अंत तक इस प्रक्रिया के पूरे होने की उम्मीद है. ऐसा माना जा रहा है कि इससे कंपनी की देनदारियां 50 से 60 फीसदी तक कम हो सकती हैं और इसके भुगतान के लिए 10 साल का लंबा वक्त भी मिल सकता है. नए निवेशकों के जुड़ने से पहले उन्हें कंपनी की वित्तीय देनदारियों की स्पष्ट तस्वीर देना इस कदम का मुख्य उद्देश्य है.

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