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अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन योजना से भानू–पूनम की जिंदगी में आई खुशियां, 2.50 लाख की प्रोत्साहन राशि मिली

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कोरबा, 13 मार्च (वेदांत समाचार)। प्रदेश में अंतरजातीय विवाह को बढ़ावा देने और सामाजिक समरसता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से संचालित “छत्तीसगढ़ अस्पृश्यता निवारणार्थ अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन योजना” आकांक्षी जिला कोरबा में भी लोगों के जीवन में खुशियां बिखेर रही है। योजना के तहत एक और नवदंपत्ति लाभान्वित हुए हैं।

कोरबा निवासी भानू प्रकाश और दुर्ग की पूनम साहू ने अंतरजातीय विवाह कर सामाजिक समरसता की मिसाल पेश की है। शासन की योजना के अंतर्गत आदिवासी विकास विभाग द्वारा दंपत्ति को 2 लाख 50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है।

कार्यालय सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग से मिली जानकारी के अनुसार भानू प्रकाश (32 वर्ष), पिता शत्रुहन लाल, निवासी जेवू दफाई सुराकछार, कोरबा अनुसूचित जाति वर्ग से हैं, जबकि उनकी पत्नी पूनम साहू (31 वर्ष), पिता माधोलाल साहू, निवासी मेघ मार्केट, नगर पंचायत उतई, जिला दुर्ग अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंध रखती हैं। दोनों का विवाह 2 मई 2025 को संपन्न हुआ था। नियमानुसार आवेदन के बाद शासन द्वारा दंपत्ति को योजना के तहत प्रोत्साहन राशि स्वीकृत की गई।

योजना के अनुसार 1 लाख रुपये दंपत्ति के संयुक्त बैंक खाते में जमा किए गए हैं, जबकि शेष 1.50 लाख रुपये तीन वर्ष के लिए सावधि जमा (एफडी) के रूप में सुरक्षित रखे गए हैं, ताकि भविष्य में यह राशि उनके लिए सहायक साबित हो सके।

आगामी गणतंत्र दिवस के अवसर पर कार्यालय सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग द्वारा नवदंपत्ति को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित भी किया जाएगा। सहायक आयुक्त श्रीकांत कसेर ने दंपत्ति को उज्ज्वल भविष्य और सुखद वैवाहिक जीवन की शुभकामनाएं दीं।

चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 11 नवदंपत्तियों को इस योजना का लाभ मिल चुका है, जो योजना की सफलता और सामाजिक समरसता की दिशा में इसके सकारात्मक प्रभाव को दर्शाता है।

योजना की प्रमुख शर्तें

  • योजना के तहत पात्र दंपत्ति को 2.50 लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
  • दूल्हा या दुल्हन में से एक व्यक्ति अनुसूचित जाति (SC) वर्ग से होना आवश्यक है।
  • दूसरा जीवनसाथी गैर-अनुसूचित जाति (सामान्य या ओबीसी) वर्ग से होना चाहिए।
  • दोनों का यह पहला विवाह होना अनिवार्य है।
  • विवाह हिंदू विवाह अधिनियम 1955 के तहत पंजीकृत होना चाहिए।
  • विवाह के एक वर्ष के भीतर आवेदन करना जरूरी है।

इच्छुक दंपत्ति कलेक्टोरेट परिसर में संचालित आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के कार्यालय में आवेदन कर सकते हैं। योजना से संबंधित विस्तृत जानकारी विभाग की वेबसाइट tribal.cg.gov.in पर भी उपलब्ध है।

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