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सरकारी जमीनों में अतिक्रमण पर सदन में हंगामा भूपेश बोले- अतिक्रमणकारियों को सरकार का संरक्षण, नारेबाजी करते हुए विपक्ष ने किया वॉकआउट

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रायपुर,10 मार्च (वेदांत समाचार)। विधानसभा में प्रश्नकाल शुरू होते ही सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण के मुद्दे पर जमकर हंगामा और नारेबाजी हुई। डोंगरगढ़ विधायक हर्षिता स्वामी बघेल ने सहकारी केंद्रीय बैंक भवन निर्माण का मामला उठाते हुए कहा कि वर्क ऑर्डर, टेंडर और भूमि पूजन के बाद भी अतिक्रमण नहीं हटाया गया, इसलिए निर्माण शुरू नहीं हो पाया।

मंत्री केदार कश्यप ने जवाब दिया कि 2023 में स्वीकृति मिली थी, लेकिन वहां पार्किंग और अन्य सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, इसलिए दूसरी जगह जमीन देखी जा रही है। इस पर हर्षिता बघेल ने कहा कि जब पहले ही सभी सुविधाएं देखकर टेंडर और भूमि पूजन हुआ था तो अब देरी क्यों हो रही है और बैंक कब तक किराए के भवन में चलेगा।

नेता प्रतिपक्ष भूपेश बघेल ने सरकार पर अतिक्रमणकारियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया और पूछा कि अतिक्रमण हटाने की तारीख बताई जाए। मंत्री ने कहा कि कलेक्टर को पत्र लिखा गया है और जल्द कार्रवाई होगी। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्षी विधायकों ने नारेबाजी करते हुए वॉकआउट कर दिया।

पश्नकाल में विपक्ष के सवाल और पक्ष का जवाब

विधायक ओंकार साहू: प्रदेश में पिछले 3 सालों में ओवरलोडिंग, बिना परमिट और बिना बीमा चलने वाले वाहनों के कितने प्रकरण बने और कितनी राशि वसूली गई?

मंत्री केदार कश्यप: इस अवधि में ओवरलोडिंग, बिना परमिट संचालन और बिना बीमा पाए जाने पर 77,810 प्रकरण बनाए गए हैं और उनसे 42 करोड़ 79 लाख 5 हजार 300 रुपए की वसूली की गई है।

भूपेश बघेल: अलग-अलग कितने प्रकरण हैं इसकी जानकारी दीजिए। यह तो सिर्फ लिखित उत्तर है।

केदार कश्यप: अलग-अलग आंकड़ों की जानकारी बाद में उपलब्ध करा दूंगा।

भूपेश बघेल: लिखित सवाल का भी जवाब नहीं दे पा रहे हैं मंत्री जी।

ओंकार साहू: जवाब में स्पष्ट जानकारी नहीं आई है। जिलेवार डाटा आना चाहिए था, कम से कम बिना परमिट वाहनों की जानकारी ही दे दीजिए।

भूपेश बघेल: मंत्री जी की तैयारी नहीं है, ना ‘क’ का जवाब आ रहा है ना ‘ख’ का।

केदार कश्यप: फिटनेस की जानकारी मैंने दी है। 2023 में फिटनेस के 88,096 मामले थे, जिनमें 87,046 पास हुए।

भूपेश बघेल: पहले निरंक बताया, अब आंकड़े बता रहे हैं। इसका मतलब तैयारी नहीं है।

ओंकार साहू: विभाग की तैयारी शून्य है, इसे अगले दिन के लिए रखा जाए।

अजय चंद्राकर: प्रश्न पूछने का अधिकार है, लेकिन धमकाने का नहीं।

संगीता सिन्हा: हमने कोई धमकी नहीं दी, आप आरोप लगा रहे हैं।

सभापति: जो प्रश्न पूछा गया था उसका लिखित उत्तर दिया गया है। अगर अंतिम पूरक प्रश्न करना है तो कर लीजिए।

भूपेश बघेल: विभाग में मंत्री का कंट्रोल नहीं है और सही जवाब नहीं मिल रहा, इसलिए हम इसका बहिष्कार करते हुए वॉकआउट कर रहे हैं।

कुंवर सिंह निषाद: कांकेर के भानुप्रतापपुर क्षेत्र में गोदावरी पावर एंड इस्पात की माइंस से लगे लगभग पौने 200 एकड़ क्षेत्र को वेस्ट मटेरियल डम्प करने के लिए दिया गया है। यह रिजर्व एरिया है, किस विभाग और अधिकारी ने तय किया कि यह जमीन गैर-खनिज युक्त है?

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय: जब आपकी सरकार थी, तब गोदावरी इस्पात को 2.65 हेक्टेयर जमीन ओवरबर्डन निस्तारण के लिए दी गई थी। 4 अगस्त 2023 को 61.41 हेक्टेयर जमीन भी आवंटित की गई थी। हमारी सरकार ने नियमों का पालन करते हुए भारत सरकार के प्रावधानों के तहत जीएसआई जांच के बाद 74.05 हेक्टेयर जमीन डम्पिंग के लिए दी है।

कुंवर सिंह निषाद: 2015 के बाद राजस्व बढ़ाने के लिए ऑनलाइन टेंडर की पारदर्शी प्रक्रिया शुरू हुई थी, लेकिन इस बार 11 साल में पहली बार बिना निविदा के फर्म को जमीन दे दी गई। जीएसआई जांच की कॉपी उपलब्ध कराई जाए।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय: भारत सरकार के खान मंत्रालय के 28 नवंबर 2024 के पत्र के अनुसार खनिज पट्टा क्षेत्र से लगी गैर-खनिज भूमि के लिए नीलामी जरूरी नहीं होती।

कुंवर सिंह निषाद: यह पौने 200 एकड़ जमीन का मामला है। खदान से लगी जमीन ही क्यों दी गई, दूसरी जगह भी दी जा सकती थी। इसमें अधिकारियों की मिलीभगत लग रही है, क्या इसकी जांच कराएंगे?

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय: इसकी जांच कराई जा चुकी है और रिपोर्ट में बताया गया है कि उस जमीन के नीचे कोई खनिज नहीं है।

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