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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश : एसिड अटैक पीड़ितों को सरकारी नौकरी देने के लिए नीति बनाएं राज्य सरकारें

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एसिड अटैक पीड़ितों के पुनर्वास और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। सोमवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे एसिड अटैक पीड़ितों को सरकारी नौकरी देने के लिए एक स्पष्ट नीति तैयार करें।

अदालत ने कहा कि यदि किसी कारणवश पीड़ितों को सरकारी नौकरी देना संभव नहीं हो पाता है, तो राज्य सरकारें उनके लिए गुज़ारा भत्ता (मासिक सहायता) देने की नीति बनाएं ताकि उन्हें आर्थिक रूप से सहारा मिल सके।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से यह भी पूछा कि अब तक सरकारी विभागों या एजेंसियों में एसिड अटैक पीड़ितों के पुनर्वास के लिए कोई ठोस योजना क्यों नहीं बनाई गई है। अदालत ने कहा कि सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश इस संबंध में जवाब दें और यह स्पष्ट करें कि ऐसी योजना बनाने में क्या दिक्कतें आ रही हैं।

यह निर्देश एसिड अटैक सर्वाइवर शाहीन मलिक के मामले की सुनवाई के दौरान दिया गया। इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत के कहने पर प्रो बोनो (निःशुल्क) पैरवी की। याचिका में बताया गया कि एसिड अटैक सर्वाइवर्स को रोजमर्रा के कई जरूरी कामों में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

याचिका में कहा गया कि एसिड अटैक पीड़ितों को बैंक खाता खोलने, आधार कार्ड बनवाने, संपत्ति का पंजीकरण कराने या अपडेट करने और मोबाइल सिम कार्ड खरीदने जैसी सामान्य प्रक्रियाओं में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इन समस्याओं के कारण उन्हें सामाजिक और आर्थिक जीवन में आगे बढ़ने में बाधाएं आती हैं।

सुनवाई के दौरान केवाईसी (KYC) रजिस्ट्रेशन से जुड़ी समस्याओं का मुद्दा भी उठाया गया। याचिका में बताया गया कि केवाईसी प्रक्रिया में अक्सर डिजिटल पहचान के लिए आंखों की पुतलियों की स्कैनिंग, पलकें झपकाने और फिंगरप्रिंट जैसी प्रक्रियाएं शामिल होती हैं। लेकिन एसिड अटैक पीड़ितों के लिए यह प्रक्रियाएं कई बार संभव नहीं होतीं, जिससे उन्हें पहचान सत्यापन में कठिनाई होती है।

इससे पहले भी कई एसिड अटैक सर्वाइवर्स ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की थी कि उनकी परिस्थितियों को देखते हुए केंद्र सरकार को एक अधिक समावेशी और वैकल्पिक डिजिटल केवाईसी प्रक्रिया लागू करने का निर्देश दिया जाए, ताकि उन्हें सरकारी और बैंकिंग सेवाओं का लाभ लेने में परेशानी न हो।

सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश को एसिड अटैक पीड़ितों के अधिकारों और उनके पुनर्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राज्यों द्वारा इस दिशा में ठोस नीति बनाई जाती है तो इससे हजारों पीड़ितों को सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिल सकेगा।

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