Vedant Samachar

कैप्टिव व कमर्शियल माइनिंग से कोल इंडिया के एकाधिकार को चुनौती, एनटीपीसी माइनिंग 20 मार्च को 1.40 लाख टन कोयले की ई-नीलामी करेगा

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सरकारी कंपनियां खुले बाजार में अपने कोयले की बिक्री के लिए सक्रिय हो गई हैं।

कोरबा,09 मार्च (वेदांत समाचार)। देश में कैप्टिव और कमर्शियल कोल माइनिंग को बढ़ावा मिलने के साथ ही कोयला क्षेत्र में लंबे समय से कायम कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) के एकाधिकार को धीरे-धीरे चुनौती मिलनी शुरू हो गई है। बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। एक ओर जहां कोल इंडिया की अनुषंगी कंपनियों का कोयला अपेक्षित मात्रा में नहीं बिक पा रहा है, वहीं दूसरी ओर निजी और अन्य सरकारी कंपनियां खुले बाजार में अपने कोयले की बिक्री के लिए सक्रिय हो गई हैं।

मिली जानकारी के अनुसार, कोल इंडिया की सहायक कंपनी भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) ने अपने कोयले की बिक्री बढ़ाने के लिए खरीदारों को आकर्षित करने हेतु प्रति टन 100 रुपये से लेकर 600 रुपये तक की छूट देने की घोषणा की है। यह कदम बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और मांग में आई कमी को देखते हुए उठाया गया है। इसी बीच एनटीपीसी माइनिंग लिमिटेड भी खुले बाजार में कोयला बिक्री के लिए आगे आई है। कंपनी छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में स्थित अपने तलाइपाली कोल माइनिंग प्रोजेक्ट से 1.40 लाख मीट्रिक टन कोयले की बिक्री के लिए ई-नीलामी आयोजित करने जा रही है। यह ई-नीलामी एमएसटीसी लिमिटेड के डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से की जाएगी।

PSU CONECT की एक रिपोर्ट के अनुसार, एमएसटीसी द्वारा जारी नीलामी कैटलॉग में बताया गया है कि यह कोयला “As is where is”, “As is what is” और “No complaint” के आधार पर उपलब्ध कराया जाएगा। इसका अर्थ है कि खरीदारों को कोयला उसी स्थिति और स्थान से उठाना होगा, जहां वह वर्तमान में उपलब्ध है। यह ई-नीलामी 20 मार्च 2026 को सुबह 11 बजे से शुरू होकर उसी दिन दोपहर 3 बजे तक आयोजित की जाएगी। नीलामी में कुल 1,40,000 मीट्रिक टन कोयला शामिल है, जिसकी ग्रेड G-12 (3700–4000 Kcal/kg) बताई गई है तथा कोयले का आकार –100 मिमी तक होगा।

नीलामी के लिए प्रारंभिक फ्लोर प्राइस 1,405 रुपये प्रति मीट्रिक टन निर्धारित किया गया है, जबकि बोली में वृद्धि की न्यूनतम सीमा 20 रुपये प्रति टन तय की गई है। कोयले की आपूर्ति रायगढ़ जिले के तलाइपाली कोल माइन स्थित कोल स्टॉकयार्ड से की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि कैप्टिव और कमर्शियल माइनिंग के विस्तार के साथ कोयला बाजार में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ेगी। इससे एक ओर उद्योगों को विकल्प मिलेंगे, वहीं दूसरी ओर कोल इंडिया जैसी बड़ी कंपनियों को भी अपनी विपणन रणनीतियों में बदलाव करना पड़ सकता है।

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