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कैबिनेट मंत्री लखन लाल देवांगन की पहल पर भिलाई खुर्द के 300 भू विस्थापितों के मुआवजा का रास्ता खुला

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मकानों का मुआवजा, बसाहट हेतु प्रति परिवार 6.78 लाख देने एसईसीएल ने दी सहमति

  1. 8 वर्ष से एसईसीएल बिना मुआवजा दिए बस्ती खाली कराने पर था आमादा
  2. मंत्री श्री देवांगन की अध्यक्षता में एसईसीएल कोरबा के विश्राम गृह में भूविस्थापितों, जिला प्रशासन और प्रबंधन की बैठक में बनी लिखित सहमति

कोरबा,18 जनवरी (वेदांत समाचार)। एसईसीएल विश्राम गृह, कोरबा में शुक्रवार को नगर विधायक एवं कैबिनेट मंत्री लखनलाल देवांगन की अध्यक्षता में एसईसीएल मानिकपुर खदान के ग्राम भिलाईखुर्द के भूविस्थापितों, एसईसीएल के अधिकारियों एवं जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच बैठक हुई।

इस बैठक में मंत्री लखन लाल देवांगन ने एसईसीएल के अधिकारियों को दो टूक कहा कि 50 वर्ष पूर्व खदान के लिए जमीन का अधिग्रहण किया गया था। तब ज़मीन का मुवाअजा दिया जा चुका था, लेकिन इतने वर्षों बाद आज ज़मीन खाली करवाई जा रही है। भू विस्थापितों को मकानों का मुआवजा और बसाहट व शिफ्टिंग का उचित मुआवजा दिए किसी भी तरह से जमीन खाली करवाना गलत है। मंत्री श्री देवांगन के बैठक में भू विस्थापितों की मांग को मजबूती से रखते हुए कहा की इतने वर्षों में एक-एक जमीन धारक के एक से अधिक परिवार हो चुके हैं, आज की स्थिति में सिर्फ एक ज़मीन धारक के बजाए एक एक परिवार के हिसाब से मुआवजा दिया जाए।

बैठक में मंत्री श्री देवांगन ने कहा की देश की ऊर्जा के लिए कोयला अतिमहत्वपूर्ण हैं, लेकिन भू विस्थापितों को साथ में लेकर खदानों का विस्तार करना होगा। मंत्री श्री देवांगन के निर्देश के बाद एसईसीएल के अधिकारियों ने बैठक में ही तीन निर्णय पर घोषणा की गई। सभी परिवारों के मकान, परसम्पति की गणना कर मुआवजा दिया जाएगा। विस्थापन हेतु 6.78 लाख प्रति परिवार को देने की घोषणा की गई। साथ ही मानिकपुर खदान के आउटसोर्सिंग कंपनियों में भू विस्थापितों को रोजगार देने पर सहमति मनी। इस निर्णय का ग्राम भिलाईखुर्द के सभी भू विस्थापितों ने स्वागत करते हुए अपनी सहमति देते हुए मंत्री श्री देवांगन का आभार जताया।

जिला प्रशासन के अधिकारियों को सभी परिवारों की बारीकी से गणनाकर जल्द से जल्द मुआवजा देने के निर्देशित किया। बैठक में मंत्री श्री देवांगन के निर्देश पर मुआवजा के साथ-साथ भू विस्थापितों को ठेके कंपनियों में भूविस्थापितों को प्राथमिकता देने पर भी सहमति बनी।

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