Vedant Samachar

कोरबा:केंद्र से 7 माह से अटकी राशि, कोरबा में जल जीवन मिशन की रफ्तार थमी

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703 गांवों में सिर्फ 107 में ही शुरू हो सकी जलापूर्ति, 150 करोड़ के तत्काल फंड की दरकार

कोरबा,08 जनवरी (वेदांत समाचार)। हर घर नल, हर घर जल के संकल्प के साथ शुरू किया गया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट जल जीवन मिशन आकांक्षी जिला कोरबा में गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रहा है। केंद्र सरकार द्वारा सिंगल विलेज स्कीम और मल्टी विलेज स्कीम की लगभग 150 करोड़ रुपए की राशि पिछले सात माह से जारी नहीं किए जाने के कारण जिले में योजना की रफ्तार लगभग थम गई है। फंड के अभाव में ठेकेदारों ने शेष कार्य आगे बढ़ाने से हाथ खड़े कर दिए हैं, जिससे योजना का लक्ष्य एक वर्ष और आगे खिसक गया है।

जिले के 703 गांवों में से अब तक केवल 107 गांवों में ही जल जीवन मिशन के तहत नियमित जलापूर्ति शुरू हो सकी है, जबकि शेष गांव आज भी शुद्ध पेयजल के इंतजार में हैं। इससे सरकार के ‘हर घर जल’ के दावों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

कटघोरा, पाली और पोड़ी उपरोड़ा ब्लॉक के 245 गांवों और लगभग 3 लाख आबादी को जलापूर्ति के लिए स्वीकृत एतमानगर समूह जलप्रदाय योजना की प्रगति भी पिछले सात माह से बेहद धीमी है। अनुबंध के अनुसार यह योजना 27 फरवरी 2025 तक पूरी होनी थी, लेकिन अब तक केवल 60 फीसदी कार्य ही पूरा हो पाया है।

शनिवार को योजना का औचक निरीक्षण करने पहुंचे नवपदस्थ कलेक्टर कुणाल दुदावत ने निर्माण कार्यों की धीमी गति पर नाराजगी जताते हुए पीएचई विभाग के ईई को संबंधित निर्माण एजेंसी मेसर्स विंध्या टेली लिंक्स लिमिटेड को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। बताया जा रहा है कि निरीक्षण के बाद विधिवत नोटिस जारी करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

जमीनी पड़ताल में सामने आया कि योजना की धीमी रफ्तार का मुख्य कारण भुगतान में भारी असंतुलन है। करीब 385 करोड़ 90 लाख रुपए की लागत वाली इस योजना में निर्माण एजेंसी द्वारा 231 करोड़ रुपए का कार्य पूरा किया जा चुका है, लेकिन अब तक सिर्फ 116 करोड़ रुपए का ही भुगतान किया गया है। शेष 115 करोड़ रुपए के बिल भुगतान के लिए लंबित हैं। भुगतान नहीं मिलने के कारण फर्म के लिए कार्य आगे बढ़ाना संभव नहीं हो पा रहा है।

योजना के तहत 28.5 एमएलडी क्षमता का जल शुद्धिकरण संयंत्र, 8 एमबीआर तथा करीब 7 लाख 75 हजार मीटर OPVC और डीआई पाइपलाइन बिछाई जा रही है, जिसके माध्यम से 245 गांवों में जलापूर्ति की जानी है।

जल जीवन मिशन के तहत कोरबा जिले में 458 गांवों में सिंगल विलेज स्कीम स्वीकृत है। इनमें से महज 107 गांवों में ही सतत जलापूर्ति शुरू हो सकी है, जबकि 351 गांवों में योजना अब भी अधूरी पड़ी है। इन गांवों में ग्रामीणों को मिशन से अब तक एक बूंद पानी भी नसीब नहीं हुआ है। इस तरह देखा जाए तो सिंगल विलेज स्कीम के तहत केवल 23 फीसदी गांवों तक ही योजना का लाभ पहुंच पाया है।

हालांकि जिन गांवों में जलापूर्ति शुरू होने का दावा किया जा रहा है, वहां भी फाइनल भुगतान नहीं हो पाने के कारण पूर्णता प्रमाण पत्र जारी नहीं किए जा सके हैं। इससे निर्माण एजेंसियों की 5 फीसदी सुरक्षा निधि भी अटकी हुई है। जिला कार्यालय में सिंगल विलेज स्कीम के लगभग 30 करोड़ रुपए और मल्टी विलेज स्कीम के करीब 115 करोड़ रुपए के बिल भुगतान लंबित हैं।

कुल मिलाकर जिले में जल जीवन मिशन को गति देने के लिए करीब 150 करोड़ रुपए के तत्काल भुगतान की जरूरत है। डबल इंजन की सरकार होने के बावजूद इस महत्वाकांक्षी योजना में बने वित्तीय संकट से सरकार की नीयत और प्राथमिकताओं पर सवाल उठने लगे हैं। यदि शीघ्र राशि जारी नहीं की गई, तो कर्ज के बोझ तले दबे निर्माण एजेंसियों के विरोध प्रदर्शन की स्थिति भी बन सकती है। हालांकि फिलहाल एजेंसियों को उम्मीद है कि सरकार जल्द फंड जारी कर योजना को पटरी पर लाएगी और कोरबा के गांवों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने का सपना साकार होगा।

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